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शरीर में हर वक्त दौड़ रहा 'साइलेंट किलर', सरकारी सर्वे में चौंकाने वाला खुलासा: 22 करोड़ लोगों का बीपी हाई, सिर्फ 10 फीसदी का ही काबू में

| Chitrakoot, Uttar Pradesh | May 19, 2026, 02:30 AM IST WhatsApp
शरीर में हर वक्त दौड़ रहा 'साइलेंट किलर', सरकारी सर्वे में चौंकाने वाला खुलासा: 22 करोड़ लोगों का बीपी हाई, सिर्फ 10 फीसदी का ही काबू में

पिछले हफ्ते चित्रकूट में मेरी मुलाकात एक पुराने दोस्त से हुई। बातचीत के दौरान उसने बताया कि उसे हाल ही में हाई ब्लड प्रेशर की शिकायत हुई है। मैंने पूछा, "दवाई चल रही है?" उसका जवाब था, "हाँ, लेकिन जब सिरदर्द होता है तब खा लेता हूँ।" यह सुनकर मैं हैरान रह गया। और यही लापरवाही सिर्फ मेरे दोस्त की नहीं, बल्कि पूरे देश की कहानी बन चुकी है।

17 मई 2026 को दुनिया भर में 'विश्व उच्च रक्तचाप दिवस' मनाया गया। इस मौके पर मेदांता अस्पताल के वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. तरुण कुमार ने एक ऐसा आँकड़ा सामने रखा जो हर भारतीय को सोचने पर मजबूर कर देता है। उन्होंने बताया कि देश में अनुमानित 22 करोड़ (220 मिलियन) लोग उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) के साथ जी रहे हैं, लेकिन इनमें से महज 10 से 12 प्रतिशत लोगों का ही ब्लड प्रेशर ठीक से नियंत्रित है

डॉ. तरुण कुमार ने चेतावनी देते हुए कहा, "उच्च रक्तचाप एक साइलेंट किलर है और भारत को दुनिया की उच्च रक्तचाप राजधानी कहा जा सकता है।" यह कोई मामूली बात नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की ताज़ा रिपोर्ट भी इसकी पुष्टि करती है, जिसके अनुसार 30 से 79 वर्ष आयु वर्ग के 21 करोड़ से अधिक भारतीय वयस्क उच्च रक्तचाप से ग्रस्त हैं, और इनमें से केवल 39 प्रतिशत को ही अपनी बीमारी की जानकारी है।

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के 2025 के पहले राष्ट्रीय स्वास्थ्य सर्वेक्षण ने तो और भी गंभीर तस्वीर पेश की है। सर्वे के मुताबिक, बीते सात वर्षों में दिल की बीमारियों के मामले लगभग तीन गुना बढ़ गए हैं। हर एक लाख की आबादी पर उच्च रक्तचाप के 3,358 मामले सामने आए हैं।


आखिर क्यों कहते हैं इसे 'साइलेंट किलर'?

मेडिकल साइंस की भाषा में उच्च रक्तचाप को अक्सर "साइलेंट किलर" कहा जाता है। इसकी वजह यह है कि ज्यादातर मामलों में इसके लक्षण इतने मामूली होते हैं कि लोग इन्हें नज़रअंदाज़ करते रहते हैं — जैसे कभी-कभार सिरदर्द, हल्का चक्कर आना, या बिना वजह थकान रहना। लेकिन अंदर ही अंदर यह शरीर के अहम अंगों — दिल, दिमाग, किडनी और आँखों — को लगातार नुकसान पहुँचाता रहता है।

डॉ. तरुण कुमार ने बताया कि आधे से ज्यादा लोगों को पता ही नहीं होता कि उनका ब्लड प्रेशर ज़रूरत से ज़्यादा है। और जिन्हें पता चलता है, उनमें से करीब आधे लोग बीच में ही दवा छोड़ देते हैं। नतीजा — काबू में आई बीमारी फिर से सिर उठा लेती है।


कब समझें कि हालत गंभीर है?

चिकित्सकों के अनुसार, जब ब्लड प्रेशर लगातार 140/90 mmHg या इससे ऊपर रहने लगे, तो इसे हाई ब्लड प्रेशर की श्रेणी में रखा जाता है। सामान्य ब्लड प्रेशर 120/80 mmHg से कम होना चाहिए।130/80 mmHg या इससे ऊपर की रीडिंग आने पर डॉक्टर से सलाह लेना ज़रूरी है।

हालाँकि बिना जाँच के इसकी पहचान मुश्किल है, फिर भी कुछ संकेत शरीर देता है जिन्हें नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए:

  • सुबह के वक्त तेज़ सिरदर्द, खासकर सिर के पिछले हिस्से में।
  • अचानक चक्कर आना या धुंधला दिखना।
  • बिना किसी भारी काम के साँस फूलना।
  • सीने में दर्द या धड़कन का तेज़ हो जाना।
  • नाक से बिना किसी कारण खून बहना।

बीमारी की जड़ कहाँ है?

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बीमारी के पीछे सिर्फ एक नहीं, बल्कि कई कारण जिम्मेदार हैं। सबसे बड़ा कारण हमारी बदली हुई जीवनशैली है:

  • खाने में नमक की अधिकता: WHO प्रतिदिन 5 ग्राम (करीब एक छोटी चम्मच) से कम नमक खाने की सलाह देता है, लेकिन भारतीय थाली में इससे कहीं ज़्यादा नमक जाता है। डॉ. तरुण कुमार ने सोडियम की मात्रा 2,300 मिलीग्राम प्रतिदिन से कम रखने की सलाह दी है, और हो सके तो 1,500 मिलीग्राम तक सीमित करें।
  • प्रोसेस्ड और जंक फूड: बाज़ार में मिलने वाले पैकेट बंद खाने, चिप्स, सॉस और बेकरी आइटम में छिपा नमक और ट्रांस फैट ब्लड प्रेशर बढ़ाने का बड़ा कारण हैं।
  • शारीरिक मेहनत की कमी: दिन भर कुर्सी पर बैठे रहना, व्यायाम न करना और स्क्रीन के सामने ज़्यादा समय बिताना।
  • तनाव और अनियमित नींद: लगातार मानसिक दबाव और कम नींद लेना भी ब्लड प्रेशर को प्रभावित करता है।
  • धूम्रपान और शराब: तंबाकू और अल्कोहल का सेवन सीधे ब्लड प्रेशर को बढ़ाता है।

चिंता की बात यह है कि अब यह बीमारी सिर्फ बुज़ुर्गों तक सीमित नहीं रही। NSO सर्वे 2025 के मुताबिक, 15 से 29 वर्ष के युवाओं में भी हृदय रोगों का प्रसार 2.1 प्रतिशत पाया गया है। विशेषज्ञ युवाओं में बढ़ते मामलों के लिए अपर्याप्त शारीरिक गतिविधि, खराब खान-पान और तनाव को जिम्मेदार मानते हैं।


क्या करें कि बीपी रहे काबू में?

डॉ. तरुण कुमार ने जोर देकर कहा कि दवाइयों के साथ-साथ खानपान और जीवनशैली में बदलाव बेहद ज़रूरी हैं। उन्होंने DASH (डाइटरी अप्रोचेज़ टू स्टॉप हाइपरटेंशन) खान-पान योजना अपनाने की सलाह दी, जिसमें फल, सब्ज़ियाँ, साबुत अनाज, कम वसा वाले डेयरी उत्पाद, मछली, मुर्गी, बीन्स, नट्स और बीज शामिल हैं।

इसके अलावा, WHO ने भी कुछ ज़रूरी सुझाव दिए हैं:

  • नियमित रूप से अपना ब्लड प्रेशर जाँचते रहें।
  • खाने में नमक की मात्रा कम करें।
  • रोज़ाना कम से कम 30 मिनट की शारीरिक गतिविधि ज़रूर करें।
  • तंबाकू और शराब के सेवन से बचें।
  • अगर डॉक्टर ने दवा लिखी है तो उसे समय पर और नियमित रूप से लें। बीच में दवा छोड़ना खतरनाक हो सकता है।

सरकार और WHO की पहल

राहत की बात यह है कि सरकार और अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ इस समस्या से निपटने के लिए गंभीर हैं। WHO ने अपनी 2025 की वैश्विक रिपोर्ट में भारत की रणनीति की सराहना की है, जिसमें सरकारी क्लीनिकों में मुफ्त जेनेरिक दवाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं इसके अलावा, भारत सरकार का 'इंडिया हाइपरटेंशन कंट्रोल इनिशिएटिव (IHCI)' और WHO का 'सीहार्ट्स (SEAHEARTS)' कार्यक्रम देश भर में चलाए जा रहे हैं।

WHO के अनुसार, अब तक दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में 6.85 करोड़ से अधिक लोगों को प्रोटोकॉल-आधारित प्रबंधन कार्यक्रमों में शामिल किया जा चुका है। साथ ही, आहार में नमक और ट्रांस फैट कम करने के लिए भी व्यापक कदम उठाए गए हैं।

यह भी गौर करने लायक है कि जन औषधि केंद्रों के ज़रिए सस्ती जेनेरिक दवाइयाँ उपलब्ध कराने की नीति ने उच्च रक्तचाप के नियंत्रण में बड़ी भूमिका निभाई है।


विश्व उच्च रक्तचाप दिवस 2026 की थीम

इस वर्ष 17 मई 2026 को 22वाँ विश्व उच्च रक्तचाप दिवस मनाया गया। इसकी थीम थी: "कंट्रोलिंग हाइपरटेंशन टुगेदर: चेक योर ब्लड प्रेशर रेगुलरली, डिफीट द साइलेंट किलर" (साथ मिलकर उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करें: नियमित रूप से अपना ब्लड प्रेशर जाँचें, साइलेंट किलर को हराएँ)।

इस थीम का मकसद लोगों को नियमित ब्लड प्रेशर जाँच के लिए प्रोत्साहित करना और समुदायों, स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं और नीति निर्माताओं के बीच समन्वय को मज़बूत करना है।


परीक्षार्थियों के लिए विशेष (SSC / UPSC / UPPSC)

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए ये जानकारी बेहद काम की है। नीचे दिए गए प्रश्नों को ज़रूर याद कर लें:

प्रश्न 1: सामान्य ब्लड प्रेशर की रीडिंग कितनी होती है?
उत्तर: 120/80 mmHg से कम।

प्रश्न 2: उच्च रक्तचाप को अंग्रेज़ी में क्या कहते हैं?
उत्तर: हाइपरटेंशन (Hypertension)।

प्रश्न 3: विश्व उच्च रक्तचाप दिवस कब मनाया जाता है?
उत्तर: 17 मई।

प्रश्न 4: भारत में उच्च रक्तचाप के लगभग कितने मरीज़ हैं?
उत्तर: लगभग 22 करोड़ (220 मिलियन)।

प्रश्न 5: DASH डाइट का पूरा नाम क्या है?
उत्तर: डाइटरी अप्रोचेज़ टू स्टॉप हाइपरटेंशन (Dietary Approaches to Stop Hypertension)।

प्रश्न 6: भारत सरकार की उच्च रक्तचाप नियंत्रण पहल का नाम क्या है?
उत्तर: इंडिया हाइपरटेंशन कंट्रोल इनिशिएटिव (IHCI)।

प्रश्न 7: WHO की 2025 वैश्विक रिपोर्ट के अनुसार 30-79 वर्ष आयु वर्ग के कितने भारतीय उच्च रक्तचाप से ग्रस्त हैं?
उत्तर: 21 करोड़ (210 मिलियन) से अधिक।


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Disclaimer: यह लेख विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO), और विशेषज्ञ चिकित्सकों की सलाह पर आधारित है। यह केवल जागरूकता और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। कोई भी दवा या उपचार शुरू करने से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।

SK NISHAD

Founder & Editor-in-Chief Uttar Pradesh , Chitrakoot
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My name is SK Nishad, the Founder of Dainik Dhamaka Patrika, a digital news platform dedicated to delivering accurate, reliable, and impactful news to the public. I am committed to responsible journalism and strive to highlight important issues with honesty, transparency, and integrity.
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