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Vitamin A के फायदे, स्रोत और कमी के लक्षण: जानिए क्यों इसे 'आंखों का रक्षक' कहा जाता है

| Chitrakoot, Uttar Pradesh | May 11, 2026, 06:45 PM IST WhatsApp
Vitamin A के फायदे, स्रोत और कमी के लक्षण: जानिए क्यों इसे 'आंखों का रक्षक' कहा जाता है

पिछले हफ्ते मेरे पास मोहल्ले के निषाद जी आए। कहने लगे — "भाईसाहब, शाम होते ही मेरी आँखें जवाब दे देती हैं। रोशनी में तो सब ठीक है, लेकिन जैसे ही अंधेरा हुआ, लगता है कोई मेरी आँखों पर पट्टी बाँध रहा है।" मैंने पूछा — खाने में क्या खाते हैं? तो पता चला कि सुबह से रोटी-चावल, दिन में चाय-बिस्किट, रात को फिर वही रोटी-सब्ज़ी। हरी सब्ज़ी तो जैसे उनकी रसोई में आती ही नहीं।

मैंने कहा — निषाद जी, आपको विटामिन A की भारी कमी हो गई है। और ये बात सिर्फ निषाद जी पर ही लागू नहीं होती। हम सब में से ज़्यादातर लोग इस एक ज़रूरी पोषक तत्व को हल्के में लेते हैं। आइए आज इसी पर पूरी चर्चा करते हैं।


ये विटामिन A क्या है?

देखिए, बहुत टेक्नीकल भाषा में नहीं जाऊँगा। इतना समझ लीजिए कि ये एक ऐसा विटामिन है जो पानी में नहीं, बल्कि चर्बी यानी फैट में घुलता है। यही वजह है कि गाजर को हमेशा घी या तेल में पकाकर खाने की सलाह दी जाती है — ताकि शरीर इसे अच्छे से सोख सके।

अब ये विटामिन हमें दो तरह से मिलता है। पहला सीधा-सीधा जानवरों से — जैसे अंडा, दूध, कलेजी। इसे साइंस की भाषा में रेटिनॉल कहते हैं। और दूसरा मिलता है पेड़-पौधों से — जैसे गाजर, पालक, शकरकंद। ये बीटा-कैरोटीन कहलाता है, जिसे हमारा शरीर अपनी ज़रूरत के मुताबिक विटामिन A में बदल लेता है।


अब सवाल ये है कि ये हमारे काम का कैसे है?

सबसे पहली चीज़ — आँखें। रात में जब आपकी आँखों की रोशनी कम होने लगे, तो समझ जाइए कि आपके शरीर में इसकी कमी शुरू हो गई है। डॉक्टर इसे रतौंधी कहते हैं। ये कोई बीमारी नहीं, बल्कि एक चेतावनी है कि अगर अभी नहीं सँभले तो आगे चलकर आँखें पूरी तरह से सूख सकती हैं और फिर रोशनी जाने का खतरा बन जाता है। खासकर छोटे बच्चों में तो ये बहुत ही खतरनाक साबित होता है।

दूसरा फायदा — बीमारियों से लड़ने की ताकत। कोरोना के बाद से हर कोई इम्यूनिटी-इम्यूनिटी चिल्ला रहा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी इम्यूनिटी की पहली दीवार कौन सी है? आपकी त्वचा, आपके फेफड़ों की अंदरूनी परत और आपकी आँतें। ये विटामिन इन तीनों को मज़बूत करता है। नतीजा — वायरस और बैक्टीरिया अंदर घुस नहीं पाते। अगर आप बार-बार सर्दी-खाँसी या पेट की गड़बड़ी से परेशान रहते हैं, तो एक बार अपनी डाइट चेक ज़रूर करें।

और हाँ, त्वचा का तो मैंने ज़िक्र किया ही नहीं। जिन लोगों की स्किन बहुत रूखी रहती है, बेजान लगती है, या बाल बेहद कमज़ोर हैं — उन्हें भी इसी पोषक तत्व की ज़रूरत है। यही कारण है कि महँगी से महँगी एंटी-एजिंग क्रीम में भी रेटिनॉल डाला जाता है।


तो खाएँ क्या?

देखिए, खाने का मामला बहुत सीधा है। आपको कोई अलग से डिब्बाबंद चीज़ खरीदने की ज़रूरत नहीं। आपकी रसोई में ही सब कुछ है। सिर्फ नज़रिया बदलने की ज़रूरत है।

अगर आप शाकाहारी हैं तो गाजर आपकी सबसे अच्छी दोस्त है। लेकिन हाँ, कच्ची गाजर चबाने से बेहतर है कि उसे हल्का पकाकर खाएँ। इसके अलावा पालक, बथुआ, शकरकंद, कद्दू — ये सब आपके लाजवाब विकल्प हैं। फलों में पपीता और आम को रोज़ाना खाने की आदत डालें। गर्मियों में तो आम वैसे भी सबको भाता है।

अंडा खाते हैं तो उसका पीला वाला हिस्सा ज़रूर खाएँ। बहुत से लोग सिर्फ सफेदी खाते हैं और ज़र्दी फेंक देते हैं — ये सबसे बड़ी गलती है। इसके अलावा हफ्ते में एक बार कलेजी खाना भी बहुत फायदेमंद है। पुराने ज़माने में दादी-नानी बच्चों को मछली के तेल की खुराक देती थीं — अब आप समझ गए होंगे क्यों।


कमी हुई तो क्या होगा?

मैं डरा नहीं रहा, बस सच बता रहा हूँ। भारत में खासकर गाँवों और गरीब तबके के बच्चों में इसकी कमी आज भी बहुत बड़ी समस्या है। जब शरीर में ये विटामिन एकदम खत्म होने लगता है तो सबसे पहले आँखों की नमी खत्म होती है। आँसू बनने बंद हो जाते हैं। डॉक्टरी भाषा में इसे ज़ीरोफ्थैल्मिया कहते हैं। अगर फिर भी ध्यान न दिया तो कॉर्निया पर सफेद धब्बे पड़ने लगते हैं और धीरे-धीरे रोशनी चली जाती है। ये सबसे खराब स्थिति है।

उससे पहले ही शरीर संकेत देने लगता है — त्वचा का रूखा होना, बार-बार दस्त लगना, खसरा जैसी बीमारियाँ जल्दी पकड़ लेना। इन संकेतों को नज़रअंदाज़ मत कीजिए।


अब कुछ नई बातें भी जान लीजिए

विज्ञान ने एक बहुत दिलचस्प चीज़ विकसित की है जिसे गोल्डन राइस कहते हैं। ये दिखने में सामान्य चावल जैसा ही है, लेकिन इसमें बीटा-कैरोटीन भरा होता है। बांग्लादेश और फिलीपींस में तो ये मंज़ूर हो चुका है। भारत में अभी इस पर मंथन चल रहा है। सोचिए, अगर इसे हरी झंडी मिल गई तो सिर्फ चावल खाकर ही बच्चों की विटामिन A की ज़रूरत पूरी हो जाएगी। गरीब तबके के लिए तो ये किसी वरदान से कम नहीं।

दूसरी बात — सरकार भी इस मामले में गंभीर है। 9 महीने से लेकर 5 साल तक के बच्चों को हर 6 महीने पर विटामिन A की खुराक मुफ्त पिलाई जाती है। आँगनबाड़ी केंद्रों पर जाकर आप ये दवा ले सकते हैं। हाल ही में कई राज्यों ने इस अभियान को और तेज़ किया है।

और हाँ, कोरोना के बाद से मल्टीविटामिन की गोलियों और कैप्सूल की बिक्री आसमान छू रही है। लेकिन मेरी आपको सलाह है कि बिना डॉक्टर को दिखाए इन सप्लीमेंट्स को हाथ मत लगाइए। ज़्यादा मात्रा में ये आपके लीवर को चौपट कर सकते हैं। प्राकृतिक स्रोतों से जो मिल रहा है, वही काफी है।


एक दिन में कितना चाहिए?

एक आम आदमी को 900 माइक्रोग्राम और औरत को 700 माइक्रोग्राम की रोज़ाना ज़रूरत होती है। इतनी मात्रा पूरी करने के लिए आपको कोई जुगाड़ नहीं करना — दिन में एक कटोरी पालक, एक मीडियम साइज़ की गाजर और एक अंडा काफी है।

गर्भवती महिलाएँ खास ध्यान रखें। हो सके तो डॉक्टर से पूछकर ही कोई सप्लीमेंट लें। अपनी मर्ज़ी से गोली खा ली तो होने वाले बच्चे को नुकसान हो सकता है।


परीक्षा की तैयारी करने वालों के लिए खास

नीचे तीन सवालों को रट लीजिए। SSC हो या UPSC — ये तीनों बार-बार पूछे जाते हैं:

सवाल: विटामिन A की कमी से कौन सी बीमारी होती है?
जवाब: रतौंधी। अंग्रेज़ी में कहें तो नाइट ब्लाइंडनेस।

सवाल: इसका रासायनिक नाम क्या है?
जवाब: रेटिनॉल।

सवाल: गाजर खाने से कौन सा विटामिन मिलता है?
जवाब: विटामिन A। गाजर में बीटा-कैरोटीन होता है जो शरीर जाकर इसी विटामिन में तब्दील हो जाता है।


नोट: ये लेख सिर्फ जानकारी देने के लिए है। कोई भी दवा या सप्लीमेंट शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह ज़रूर करें। हर किसी का शरीर अलग है, दूसरे की देखा-देखी दवा खाना खतरनाक हो सकता है।

SK NISHAD

Founder & Editor-in-Chief Uttar Pradesh , Chitrakoot
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My name is SK Nishad, the Founder of Dainik Dhamaka Patrika, a digital news platform dedicated to delivering accurate, reliable, and impactful news to the public. I am committed to responsible journalism and strive to highlight important issues with honesty, transparency, and integrity.
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