नई दिल्ली । सूचनाओं के इस दौर में सही बात ढूँढना आटे में नमक जैसा हो गया है। हर तरफ ढेर सारी जानकारी, लेकिन क्या सच है, क्या झूठ, किस पर भरोसा करें – यह एक बड़ी मुश्किल बन गई है। खासकर यौन और प्रजनन स्वास्थ्य (Sexual and Reproductive Health and Rights) जैसे नाजुक मामले में तो गलत जानकारी जानलेवा साबित हो सकती है।
इसी समस्या का हल लेकर आया है ChatHRP। WHO और उसके सहयोगी संगठनों (UNDP, UNFPA, UNICEF, World Bank) के विशेष कार्यक्रम HRP ने एक ऐसा टूल बनाया है जो AI की मदद से सिर्फ विश्वसनीय और प्रमाणित जानकारी देगा।
यह टूल कैसे काम करता है?
ChatHRP को आप सवाल पूछ सकते हैं – बिल्कुल वैसे ही जैसे किसी एक्सपर्ट से पूछते हैं। यह आपको जवाब देगा, और सबसे अच्छी बात यह कि जवाब के साथ स्रोत भी बताएगा। यानी ये कोई आम चैटबॉट नहीं है जो कुछ भी उगल दे। यह सिर्फ WHO और HRP की अपनी रिसर्च और गाइडलाइन्स से जानकारी लेता है।
खास बात यह है कि यह कम इंटरनेट स्पीड में भी चल जाता है और कई भाषाओं में सवाल-जवाब कर सकता है। यानी अफ्रीका के किसी दूरदराज इलाके में बैठा स्वास्थ्यकर्मी भी इसका इस्तेमाल कर सकता है।
किसके लिए है यह टूल?
अभी यह बीटा टेस्टिंग चरण में है और खासतौर पर इन लोगों के लिए बनाया गया है:
- नीति-निर्माता – सही आंकड़ों के आधार पर नीतियाँ बनाने के लिए
- शोधकर्ता – अपने रिसर्च के लिए सही स्रोत ढूँढने के लिए
- डॉक्टर और नर्सें – अपनी स्किल्स अपडेट रखने के लिए
- सिविल सोसायटी – अपने अभियानों के लिए सच्ची जानकारी लेने के लिए
आप पूछ सकते हैं ऐसे सवाल
मान लीजिए कोई डॉक्टर जानना चाहता है – "प्रेग्नेंसी के दौरान डायबिटीज को कैसे मैनेज करें?" ChatHRP तुरंत WHO की गाइडलाइन्स के हिसाब से जवाब देगा।
कोई स्वास्थ्यकर्मी पूछे – "क्या ब्रेस्टफीडिंग के दौरान आईयूडी (गर्भनिरोधक उपकरण) इस्तेमाल किया जा सकता है?" टूल पलक झपकते जवाब देगा।
कोई रिसर्चर पूछे – "ओशिनिया में 15 से 49 साल की महिलाओं पर हिंसा के नवीनतम आंकड़े क्या हैं?" ChatHRP आपको सटीक डेटा देगा।
कोई नीति-निर्माता पूछे – "प्रसवोत्तर रक्तस्राव (PPH) को रोकने के लिए क्या कहा जा सकता है?" टूल आपको टॉकिंग पॉइंट्स देगा।
गलत जानकारी कितनी खतरनाक है?
HRP के एक ताजा अध्ययन में यह साबित हुआ है कि यौन और प्रजनन स्वास्थ्य के मामलों में गलत जानकारी के खतरनाक नतीजे होते हैं। यह सिर्फ एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र, कानूनों और नीतियों को प्रभावित करती है। यहाँ तक कि मानवाधिकारों को भी नुकसान पहुँचाती है।
आपने सोशल मीडिया पर कितनी बार देखा होगा – झूठे दावे, गलत घरेलू नुस्खे, परिवार नियोजन के तरीकों पर अफवाहें। यह सब लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ है। ChatHRP इसी गंदगी को साफ करने का एक छोटा लेकिन बड़ा कदम है।
इसकी सबसे बड़ी ताकत क्या है?
ChatHRP किसी AI की राय नहीं थूकता, न ही यह सोशल मीडिया के ट्रेंड्स देखता है। यह सिर्फ सबूत देखता है। सिर्फ वो जानकारी जो WHO और HRP ने वैज्ञानिक तरीके से परखी हो।
अगर टूल के पास किसी सवाल का जवाब नहीं है, तो वह "मुझे नहीं पता" कह देगा। और आप उसे फीडबैक दे सकते हैं। यही तो असली ईमानदारी है – जो नहीं पता, वो कहो, गलत तो मत बोलो।
एक पत्रकार की नज़र से
देखिए भाई, आज के ज़माने में हर चैटबॉट आपको 'हर चीज़ का जवाब' देने का दावा करता है। चाहे वो गूगल का बार्ड हो, ओपनएआई का चैटजीपीटी हो, या कोई और। लेकिन असली सवाल यह है – उनका जवाब किस भरोसे पर है?
ChatHRP इसी भरोसे का नाम है। क्योंकि यह WHO जैसी संस्था के 70 साल के अनुभव और रिसर्च पर खड़ा है। यह किसी का ऑपिनियन नहीं देता, यह सबूत देता है। यह किसी एल्गोरिदम की फीडिंग नहीं, बल्कि डॉक्टरों और वैज्ञानिकों की मेहनत का नतीजा है।
खासकर भारत जैसे देश में, जहाँ प्रजनन स्वास्थ्य को लेकर कई भ्रांतियाँ हैं, ऐसे टूल की बहुत ज़रूरत है।
क्या यह आम लोगों के लिए भी है?
फिलहाल यह टूल प्रोफेशनल्स यानी नीति-निर्माताओं, शोधकर्ताओं, डॉक्टरों के लिए बनाया गया है। लेकिन अगर सब कुछ ठीक रहा, तो आने वाले समय में यह आम लोगों के लिए भी उपलब्ध हो सकता है। तब कोई भी गाँव की महिला या शहर का युवा अपनी सेहत से जुड़ी बातें बिना झिझक पूछ सकेगा।
आखिरी बात
हर इंसान को, चाहे वह दुनिया के किसी भी कोने में क्यों न हो, सच्ची और सही स्वास्थ्य जानकारी का अधिकार है। ChatHRP उस अधिकार को साकार करने की दिशा में एक मजबूत कदम है। यह उन सबके लिए उम्मीद की किरण है, जो अफवाहों के अंधेरे में सही राह ढूँढ रहे हैं।




टिप्पणियाँ (0)
कोई टिप्पणी नहीं। सबसे पहले टिप्पणी करें!
एक टिप्पणी लिखें
आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा। आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *