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बाल झड़ना, चेहरे पर झुर्रियाँ और घाव न भरना — कहीं आपकी डाइट में 'ब्यूटी विटामिन' की कमी तो नहीं?

| Chitrakoot, Uttar Pradesh | May 23, 2026, 07:51 PM IST WhatsApp
बाल झड़ना, चेहरे पर झुर्रियाँ और घाव न भरना — कहीं आपकी डाइट में 'ब्यूटी विटामिन' की कमी तो नहीं?

चित्रकूट के कर्वी मोहल्ले की रहने वाली 28 साल की प्रिया शर्मा पिछले छह महीने से बालों के झड़ने से परेशान थीं। महँगे शैंपू, सीरम, घरेलू नुस्खे — सब आज़मा लिए। कोई फर्क नहीं पड़ा। आखिरकार जिला अस्पताल के त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. अंजलि मिश्रा के पास पहुँचीं। डॉक्टर ने जो बताया, वो चौंकाने वाला था।

"प्रिया के शरीर में विटामिन E का स्तर सामान्य से बहुत कम था," डॉ. मिश्रा ने बताया। "लोग सोचते हैं कि विटामिन E सिर्फ त्वचा के लिए ज़रूरी है, लेकिन ये बालों, आँखों, इम्यूनिटी और यहाँ तक कि दिल के लिए भी उतना ही अहम है।"

डॉ. मिश्रा की OPD में हर हफ्ते ऐसे 8-10 मरीज़ आते हैं जिनकी समस्या की जड़ विटामिन E की कमी होती है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में करीब 30-40% वयस्कों में विटामिन E का स्तर ज़रूरत से कम है। हैरानी की बात ये है कि ज़्यादातर लोगों को इसकी भनक तक नहीं होती।


क्या करता है शरीर में ये विटामिन?

डॉ. मिश्रा ने बताया कि विटामिन E एक फैट में घुलनशील विटामिन है, जिसका रासायनिक नाम टोकोफेरॉल (Tocopherol) है। शरीर में इसके तीन बड़े काम हैं:

पहला — स्किन और बालों के लिए: ये एक नेचुरल एंटीऑक्सीडेंट है। मतलब, ये शरीर की कोशिकाओं को फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाता है। यही वजह है कि इसे 'ब्यूटी विटामिन' भी कहते हैं। त्वचा पर झुर्रियाँ कम करना, बालों को जड़ से मज़बूत करना — ये इसी के काम हैं।

दूसरा — इम्यून सिस्टम: विटामिन E सफेद रक्त कोशिकाओं को मज़बूत करता है, जो बैक्टीरिया और वायरस से लड़ती हैं। बुज़ुर्गों में तो ये और भी ज़रूरी हो जाता है।

तीसरा — खून का थक्का न जमने देना: ये खून की नसों में थक्का जमने से रोकता है, जिससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा कम होता है।


शरीर देता है ये छह चेतावनी

डॉ. मिश्रा के मुताबिक, विटामिन E की कमी के ये लक्षण सबसे पहले नज़र आते हैं:

  • बालों का जरूरत से ज्यादा झड़ना और दोमुँहे बाल।
  • त्वचा का बेजान, रूखा और समय से पहले झुर्रीदार होना।
  • छोटे घाव या चोट का जल्दी न भरना।
  • हाथ-पैरों में झुनझुनी या सुन्नपन (नसों की कमज़ोरी)।
  • बार-बार बीमार पड़ना, सर्दी-ज़ुकाम जल्दी होना।
  • आँखों की रोशनी कमज़ोर होना।

"अगर इनमें से तीन या ज़्यादा लक्षण दिखें, तो एक बार ब्लड टेस्ट ज़रूर करवाएँ," डॉ. मिश्रा ने सलाह दी।


तो खाएँ क्या?

ये पूछने पर डॉ. मिश्रा हँस पड़ीं — "आपके चित्रकूट के खेतों में ही पूरी दवा उग रही है।" उन्होंने बताया कि विटामिन E के प्राकृतिक स्रोत आसानी से उपलब्ध हैं:

खाद्य पदार्थ प्रकार टिप्पणी
सूरजमुखी के बीज, बादाम, मूँगफली नट्स और सीड्स रोज़ाना एक मुट्ठी भर काफी है।
पालक, बथुआ, सरसों का साग हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ हल्का पकाकर खाएँ, ज़्यादा न पकाएँ।
सूरजमुखी तेल, सरसों तेल, ऑलिव ऑयल खाने का तेल रोज़ाना खाने में इस्तेमाल करें।
एवोकाडो फल अगर उपलब्ध हो तो ज़रूर खाएँ।
अंडे की ज़र्दी नॉन-वेज हफ्ते में 3-4 अंडे पर्याप्त हैं।

एक ज़रूरी बात — विटामिन E फैट में घुलता है। इसलिए इन चीज़ों को थोड़े तेल या घी के साथ खाएँ, तभी शरीर इसे सोख पाएगा।


नया क्या है?

हाल ही में AIIMS दिल्ली के एक अध्ययन में पाया गया कि विटामिन E का पर्याप्त सेवन अल्ज़ाइमर और डिमेंशिया जैसी बीमारियों के खतरे को कम करता है। दूसरी तरफ, बाज़ार में विटामिन E के कैप्सूल और तेल की बिक्री बढ़ी है। लेकिन डॉ. मिश्रा साफ कहती हैं — "बिना डॉक्टर की सलाह के सप्लीमेंट न लें। ज़रूरत से ज़्यादा मात्रा खून को पतला कर सकती है और चोट लगने पर खून रुकना मुश्किल हो सकता है।"

ICMR के अनुसार, एक स्वस्थ वयस्क को रोज़ 15 मिलीग्राम विटामिन E की ज़रूरत होती है। इतनी मात्रा पूरी करने के लिए दिन में एक मुट्ठी बादाम और एक कटोरी पालक काफी है।


परीक्षार्थियों के लिए (SSC / UPSC / UPPSC)

प्रतियोगी परीक्षाओं में विटामिन E से ये सवाल बार-बार आते हैं:

प्रश्न 1: विटामिन E का रासायनिक नाम क्या है?
उत्तर: टोकोफेरॉल (Tocopherol)।

प्रश्न 2: विटामिन E की कमी से कौन सी बीमारी होती है?
उत्तर: नसों की कमज़ोरी, मांसपेशियों की कमज़ोरी और प्रजनन क्षमता में कमी।

प्रश्न 3: विटामिन E वसा में घुलनशील है या पानी में?
उत्तर: वसा (फैट) में घुलनशील।

प्रश्न 4: बादाम और सूरजमुखी के बीजों में कौन सा विटामिन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है?
उत्तर: विटामिन E।

प्रश्न 5: ICMR के अनुसार एक वयस्क को रोज़ कितने विटामिन E की आवश्यकता है?
उत्तर: 15 मिलीग्राम।


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Disclaimer: यह रिपोर्ट सामान्य जानकारी और जागरूकता के लिए है। कोई भी सप्लीमेंट या दवा शुरू करने से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।

SK NISHAD

Founder & Editor-in-Chief Uttar Pradesh , Chitrakoot
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My name is SK Nishad, the Founder of Dainik Dhamaka Patrika, a digital news platform dedicated to delivering accurate, reliable, and impactful news to the public. I am committed to responsible journalism and strive to highlight important issues with honesty, transparency, and integrity.

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