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20 मई का इतिहास: जब वास्कोडिगामा ने कालीकट की धरती पर रखा कदम, चेमा ने एवरेस्ट पर फहराया तिरंगा और बिपिन चंद्र पाल जैसा क्रांतिकारी हमें छोड़ गया

| Chitrakoot, Uttar Pradesh | May 19, 2026, 06:30 PM IST WhatsApp
20 मई का इतिहास: जब वास्कोडिगामा ने कालीकट की धरती पर रखा कदम, चेमा ने एवरेस्ट पर फहराया तिरंगा और बिपिन चंद्र पाल जैसा क्रांतिकारी हमें छोड़ गया

पिछले महीने मैं केरल के कोझीकोड (कालीकट) गया था। समुद्र किनारे एक छोटे से मंच पर खड़े होकर सोच रहा था कि आज से ठीक 527 साल पहले इसी तट पर एक अजनबी जहाज़ ने लंगर डाला होगा। जहाज़ से उतरे एक पुर्तगाली नाविक ने जब पहली बार भारत की मिट्टी को छुआ होगा, तो उसे नहीं पता था कि वो इतिहास का सबसे बड़ा समुद्री रास्ता खोज चुका है। उस नाविक का नाम था — वास्कोडिगामा। और वो दिन था — 20 मई 1498

लेकिन 20 मई का दिन सिर्फ विदेशी कदमों का गवाह नहीं है। 1965 में इसी तारीख को एक भारतीय ने दुनिया की सबसे ऊँची चोटी माउंट एवरेस्ट पर अपने पैर जमाए और पूरे देश का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया। और उससे ठीक 33 साल पहले, 1932 में इसी दिन 'लाल-बाल-पाल' की तिकड़ी के एक अहम स्तंभ ने अंतिम साँस ली थी — बिपिन चंद्र पाल

तो चलिए, इस यात्रा पर निकलते हैं 20 मई के इतिहास की। हर घटना को बारीकी से समझेंगे, एकदम आम बोलचाल की ज़ुबान में।


1498: जब एक पुर्तगाली ने छुआ भारत का सीना और दुनिया का नक्शा बदल गया

15वीं सदी का आखिरी दशक। यूरोप के व्यापारियों को भारत के मसालों का जुनून सवार था। लेकिन ज़मीनी रास्ता खतरनाक था — अरब के रेगिस्तान, तुर्क साम्राज्य की फौजें। ऐसे में पुर्तगाल के राजा ने एक निडर नाविक को बुलाया और कहा — "समुद्र से भारत का रास्ता खोजो।" वो नाविक था वास्कोडिगामा।

1497 में लिस्बन से चार जहाज़ों का काफिला निकला। अफ्रीका के पूरे किनारे को घेरते हुए, भयंकर तूफानों और बीमारियों से जूझते हुए, आखिरकार 20 मई 1498 की सुबह वो केरल के कालीकट (आज का कोझीकोड) के तट पर पहुँच ही गया। कहते हैं कि जब स्थानीय लोगों ने गोरे चमड़ी वाले इन अजनबियों को देखा तो हैरान रह गए।

वास्कोडिगामा का भारत आगमन सिर्फ एक यात्रा नहीं थी — ये उस दौर की शुरुआत थी जिसने भारत को पहले पुर्तगालियों, फिर डच, फ्रांसीसी और अंत में अंग्रेज़ों का गुलाम बना दिया। लेकिन अगर उस दिन गामा ने हिम्मत हार दी होती, तो शायद इतिहास की किताबें कुछ और ही कहानी लिखतीं।


1965: अवतार सिंह चेमा और एवरेस्ट पर तिरंगा

अब ज़रा सदियों का फासला लाँघकर 20वीं सदी के छठे दशक में चलते हैं। साल 1965। भारत अभी-अभी 1962 के युद्ध की हार का ज़ख्म भूलने की कोशिश कर रहा था। ऐसे में देश को एक ऐसी उपलब्धि की ज़रूरत थी जो पूरी दुनिया को दिखा सके कि भारतीय अब कमज़ोर नहीं रहे।

20 मई 1965 की सुबह, नेपाल की बर्फीली ढलानों पर कुछ भारतीय पर्वतारोही धीरे-धीरे ऊपर बढ़ रहे थे। ऑक्सीजन की कमी, माइनस 40 डिग्री तापमान, और हर कदम पर मौत का खतरा। लेकिन उनकी आँखों में एक ही सपना था — एवरेस्ट की चोटी पर भारत का झंडा लहराना।

और उस दिन कैप्टन अवतार सिंह चेमा ने ये सपना सच कर दिखाया। वो दुनिया की सबसे ऊँची चोटी (8,848 मीटर) पर कदम रखने वाले पहले भारतीय बन गए। उनके साथी नवांग गोम्बू भी साथ थे, जो पहले 1963 में एक अमेरिकी अभियान के साथ एवरेस्ट फतह कर चुके थे।

बाद में पूरे भारतीय दल ने इतिहास रच दिया — एक ही सीज़न में नौ पर्वतारोहियों ने एवरेस्ट की चोटी पर पहुँचकर विश्व रिकॉर्ड बनाया। प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने इस उपलब्धि पर पूरे देश की तरफ से सलामी दी थी।


1932: जब बिपिन चंद्र पाल की आवाज़ हमेशा के लिए शांत हो गई

20 मई 1932 को देश ने अपना एक ऐसा सपूत खो दिया जिसने अंग्रेज़ी हुकूमत की नींद हराम कर रखी थी। बिपिन चंद्र पाल — 'लाल-बाल-पाल' की तिकड़ी के तीसरे स्तंभ। (लाला लाजपत राय और बाल गंगाधर तिलक के साथ)

पाल का जन्म 1858 में सिलहट (अब बांग्लादेश) में हुआ था। वो एक जबरदस्त वक्ता, लेखक और पत्रकार थे। उन्होंने 'स्वराज' शब्द को पूरे देश में घर-घर पहुँचाने का काम किया — और ये शब्द उन्होंने तब दिया जब महात्मा गाँधी भारतीय राजनीति में नहीं आए थे।

पाल ने माना कि आज़ादी सिर्फ कानूनी बहसों से नहीं, बल्कि जनता की ताकत से मिलेगी। उन्होंने बंगाल में क्रांतिकारी विचारों की जो लौ जलाई, वो आगे चलकर पूरे देश में फैल गई। उनकी मृत्यु पर पूरे देश ने शोक मनाया था।


1900: सुमित्रानंदन पंत — हिंदी कविता का हिमालय

20 मई 1900 को उत्तराखंड के कौसानी गाँव में एक बच्चे ने जन्म लिया, जिसका नाम आगे चलकर हिंदी साहित्य के आसमान का सितारा बना — सुमित्रानंदन पंत

पंत जी छायावादी युग के चार स्तंभों में से एक थे। उनकी कविताएँ प्रकृति और मानव मन की गहराइयों को छूती हैं। "वियोगी होगा पहला कवि, आह से उपजा होगा गान" जैसी पंक्तियाँ लिखने वाले इस कवि को 1968 में ज्ञानपीठ पुरस्कार और 1961 में पद्मभूषण से सम्मानित किया गया। उनकी कविता 'ग्राम्या' ने गाँव की ज़िंदगी को जैसे शब्दों में पिरोया, वो बेमिसाल है।


दुनिया की कुछ और बड़ी घटनाएँ

20 मई सिर्फ भारत के लिए ही नहीं, पूरी दुनिया के लिए कई मायनों में खास रहा है। नीचे देखिए कुछ और घटनाएँ:

  • 1873: लेवी स्ट्रॉस और जैकब डेविस ने नीली जींस के लिए पेटेंट हासिल किया। उन्होंने पैंट की जेबों पर ताँबे की रिवेट लगाने का तरीका खोजा, जो आज हर जींस की पहचान है।
  • 1927: चार्ल्स लिंडबर्ग ने न्यूयॉर्क से पेरिस तक अकेले बिना रुके उड़ान भरने का साहसिक अभियान शुरू किया। उनका छोटा विमान 'स्पिरिट ऑफ सेंट लुइस' 33 घंटे बाद पेरिस पहुँचा और इतिहास रच दिया।
  • 1932: अमेलिया इयरहार्ट पहली महिला बनीं जिन्होंने अकेले अटलांटिक महासागर पार किया। उनकी इस उड़ान ने दुनिया भर की महिलाओं को प्रेरित किया।
  • 1983: विज्ञान की दुनिया में एक बड़ी खोज सामने आई। 'साइंस' जर्नल में पहली बार HIV वायरस की पहचान प्रकाशित हुई, जो आगे चलकर एड्स का कारण बना।
  • 1990: हबल स्पेस टेलीस्कोप ने अंतरिक्ष से पहली तस्वीरें भेजीं। तारों और गैलेक्सियों की इन तस्वीरों ने ब्रह्मांड को समझने का हमारा नज़रिया बदलकर रख दिया।
  • 2012: उत्तरी इटली में 5.9 तीव्रता के भूकंप ने भारी तबाही मचाई, जिसमें 27 लोगों की जान गई और ऐतिहासिक इमारतें ध्वस्त हो गईं।
  • 2013: अमेरिका के मूर, ओक्लाहोमा में EF5 श्रेणी का भयंकर बवंडर आया, जिसमें 24 लोग मारे गए और हजारों बेघर हुए।

20 मई 2026: आज का दिन क्यों है खास?

इस वर्ष 20 मई 2026 को एक नहीं, बल्कि तीन-तीन खास मौके हैं। सबसे पहले, पूरी दुनिया में विश्व माप विज्ञान दिवस (World Metrology Day) मनाया जाएगा। यह दिन 1875 में मीटर समझौते पर हस्ताक्षर की याद में मनाते हैं, जिसने वैश्विक माप प्रणाली को एक समान बनाया। थीम है — "सस्टेनेबल डेवलपमेंट के लिए मापन" (अनुमानित)।

दूसरा, आज विश्व मधुमक्खी दिवस (World Bee Day) भी है। संयुक्त राष्ट्र ने 2017 में इसे मंज़ूरी दी थी ताकि परागण में मधुमक्खियों की भूमिका और खाद्य सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा सके।

तीसरा, भारत के लिए यह दिन गौरव का है — 1965 की एवरेस्ट विजय की 61वीं वर्षगाँठ। पर्वतारोहण संस्थानों और स्कूलों में इस उपलब्धि पर कार्यक्रम होंगे।


एग्जाम वालों के लिए खास कोना

नीचे लिखे सवाल SSC, UPSC और UPPSC के लिए बेहद ज़रूरी हैं। इन्हें एक बार ज़रूर याद कर लीजिए:

सवाल: वास्कोडिगामा भारत के किस तट पर पहुँचा था और कब?
जवाब: कालीकट (अब कोझीकोड, केरल) के तट पर, 20 मई 1498।

सवाल: एवरेस्ट पर चढ़ने वाले पहले भारतीय कौन थे और कब?
जवाब: कैप्टन अवतार सिंह चेमा, 20 मई 1965।

सवाल: बिपिन चंद्र पाल का निधन कब हुआ?
जवाब: 20 मई 1932।

सवाल: सुमित्रानंदन पंत का जन्म कब हुआ?
जवाब: 20 मई 1900।

सवाल: विश्व माप विज्ञान दिवस और विश्व मधुमक्खी दिवस कब मनाए जाते हैं?
जवाब: 20 मई।

सवाल: हबल स्पेस टेलीस्कोप ने पहली तस्वीरें कब भेजीं?
जवाब: 20 मई 1990।


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Disclaimer: यह लेख विभिन्न ऐतिहासिक स्रोतों, सरकारी वेबसाइटों और समाचार एजेंसियों से प्राप्त जानकारी पर आधारित है। तथ्यों की पुष्टि के पूर्ण प्रयास किए गए हैं।

SK NISHAD

Founder & Editor-in-Chief Uttar Pradesh , Chitrakoot
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My name is SK Nishad, the Founder of Dainik Dhamaka Patrika, a digital news platform dedicated to delivering accurate, reliable, and impactful news to the public. I am committed to responsible journalism and strive to highlight important issues with honesty, transparency, and integrity.
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