स्टडी इन इंडिया एजुकेशन-डिप्लोमैटिक कॉन्क्लेव 2026 में धर्मेंद्र प्रधान का संबोधन, 50+ देशों के राजनयिक शामिल
स्टडी इन इंडिया एजुकेशन-डिप्लोमैटिक कॉन्क्लेव 2026 में धर्मेंद्र प्रधान का संबोधन, 50+ देशों के राजनयिक शामिल
नई दिल्ली (PIB)। शिक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित ‘स्टडी इन इंडिया एजुकेशन-डिप्लोमैटिक कॉन्क्लेव 2026’ में 50 से अधिक देशों के राजदूतों, उच्चायुक्तों और राजनयिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का आयोजन नई दिल्ली स्थित सुषमा स्वराज भवन में किया गया।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के लागू होने के बाद भारत की शिक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार हुए हैं। उन्होंने बताया कि भारत शिक्षा के अंतर्राष्ट्रीयकरण, गुणवत्ता सुधार, नवाचार और वैश्विक साझेदारी को प्राथमिकता दे रहा है।
उन्होंने प्रधानमंत्री Narendra Modi के विकसित भारत 2047 के विजन का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत वैश्विक शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार का उभरता हुआ केंद्र बन रहा है।
वैश्विक सहयोग पर जोर
श्री प्रधान ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जैव प्रौद्योगिकी, सेमीकंडक्टर और सतत ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में भारत विश्वसनीय नवाचार भागीदार के रूप में उभर रहा है। उन्होंने विदेशी उच्च शिक्षा संस्थानों से भारत की तेजी से विकसित हो रही, बहुविषयक और सुलभ शिक्षा प्रणाली के साथ सहयोग करने का आह्वान किया।
उच्च शिक्षा सचिव डॉ. विनीत जोशी ने बताया कि यूजीसी के नए विनियम 2023 के तहत विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में परिसर स्थापित करने के लिए पारदर्शी और समयबद्ध ढांचा उपलब्ध कराया गया है। ऑस्ट्रेलिया, इटली, यूनाइटेड किंगडम और अमेरिका के कई प्रमुख संस्थानों को एक माह के भीतर स्वीकृति प्रदान की गई है।
सम्मेलन के प्रमुख सत्र
सम्मेलन में निम्न विषयों पर विशेष सत्र आयोजित किए गए:
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भारतीय ज्ञान प्रणाली एक वैश्विक शैक्षणिक पेशकश
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एसपीएआरसी और जीआईएएन के माध्यम से अकादमिक साझेदारी
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कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं उन्नत प्रौद्योगिकी
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यूजीसी विनियम 2023 और विदेशी विश्वविद्यालय परिसर
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भारत की कौशल संरचना का अंतर्राष्ट्रीयकरण
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भारत इनोवेट्स 2026
इस सम्मेलन ने वैश्विक शैक्षणिक साझेदारी, छात्र गतिशीलता, संयुक्त कार्यक्रमों और अनुसंधान सहयोग को नई दिशा प्रदान की।
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