ब्रेकिंग न्यूज़

SDM ने खुद ही संभाली नगर पंचायत, तो जनता ने पूछ लिया – 5 साल का पैसा कहां गया, और अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की?

SDM ने खुद ही संभाली नगर पंचायत, तो जनता ने पूछ लिया – 5 साल का पैसा कहां गया, और अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की?

SDM ने खुद ही संभाली नगर पंचायत, तो जनता ने पूछ लिया – 5 साल का पैसा कहां गया, और अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की?

चित्रकूट। एक ओर मऊ नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार उप जिलाधिकारी राम ऋषि रमन को सौंपा गया, दूसरी ओर उनके पदभार ग्रहण करते ही जो विकास के दावे किए गए, उन्होंने प्रशासनिक निगरानी और पिछले बजट को लेकर कई पुराने सवालों को फिर से ज़िंदा कर दिया है।

कार्यभार संभालने के तुरंत बाद एसडीएम रमन ने जनता को आश्वस्त किया कि नगर पंचायत क्षेत्र में स्वच्छता, सड़क, नाली और प्रकाश व्यवस्था को अब प्राथमिकता से बेहतर बनाया जाएगा। उन्होंने नियमित साफ-सफाई और जल निकासी को तेज करने की बात कही। लेकिन उनके इस बयान के राजनीतिक और प्रशासनिक मायने गहरे हैं।

"बेहतर बनाएंगे" का अर्थ?

यदि नवनियुक्त अधिशासी अधिकारी स्वच्छता, सड़क और नाली को "बेहतर" बनाने की बात कर रहे हैं, तो इसका सीधा अर्थ यह हुआ कि अभी तक ये व्यवस्थाएँ बेहतर नहीं थीं। अब सवाल यह उठता है कि पिछले पाँच वर्षों में नगर पंचायत को बुनियादी ढाँचे के लिए सरकार से मिला धन आखिर गया कहाँ? यदि स्थिति अब भी बेहतर करने लायक है, तो क्या पिछले प्रशासन ने योजनाओं को धरातल पर उतारा ही नहीं, या उतरा तो फिर पैसा किन मदों में खर्च हुआ? बही-खातों की यह पड़ताल अब अपरिहार्य हो गई है।

SDM रहते क्या कार्रवाई हुई?

दूसरा, और भी अहम, प्रश्न स्वयं राम ऋषि रमन की पिछली भूमिका से जुड़ता है। वे पहले से ही इसी मऊ में उप जिलाधिकारी पद पर तैनात थे। तहसील स्तर पर एसडीएम का दायित्व होता है कि वह राजस्व प्रशासन के साथ-साथ भूमि, कानून-व्यवस्था और विकास कार्यों की निगरानी करे, और नगर निकायों की जवाबदेही भी सुनिश्चित करे। जब तक वे एसडीएम रहे, क्या उन्होंने कभी सड़क, नाली और स्वच्छता की इसी खस्ता हालत पर कोई समीक्षा बैठक की? क्या नगर पंचायत से खर्च का ब्यौरा माँगा गया? जिस सड़क और प्रकाश व्यवस्था को आज बेहतर करने का वादा किया जा रहा है, क्या उप जिलाधिकारी रहते हुए उन्होंने उसकी बदहाली का संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की थी?

प्रशासनिक विरोधाभास

प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा आम है कि तहसील का मुखिया रहते हुए ही नगर की प्रशासनिक कमान भी संभालना, अपने ही कार्यकाल की जाँच खुद करने जैसा है। स्थानीय लोग हालाँकि रमन की सक्रिय कार्यशैली की तारीफ करते हैं और उनसे उम्मीद लगाए हैं, लेकिन एक बड़ा तबका सवाल भी कर रहा है। उनका कहना है कि "जब पिछले कार्यकाल में भी उनसे कई विकास कार्यों को गति मिली, तो फिर आज बेहतर बनाने की ज़रूरत क्यों पड़ रही है? क्या पहले जो कार्य हुए, वे नाकाफी थे या अधूरे रह गए?"

आगे की राह

एसडीएम रमन ने नगर को आदर्श बनाने के लिए विशेष अभियान और सड़क चौड़ीकरण की प्राथमिकता का ज़िक्र किया है। उम्मीद की जानी चाहिए कि वे अपने इस नए प्रभार में सिर्फ वादे नहीं करेंगे, बल्कि नगर पंचायत के पिछले पाँच साल के खर्च का ऑडिट सार्वजनिक कर यह भी बताएँगे कि अब तक जो योजनाएँ धरातल पर नहीं उतरीं, उनकी ज़िम्मेदारी कौन लेगा। काश्तकारों और नगरवासियों की निगाहें अब सिर्फ सड़कों की मरम्मत पर ही नहीं, बल्कि उस हिसाब-किताब पर भी टिकी हैं, जो सालों से नगर पंचायत के बही-खातों में दबा पड़ा है।

दैनिक धमाका पत्रिका ब्यूरो  draggable=
दैनिक धमाका पत्रिका ब्यूरो
Founder & Editor-in-Chief

Chitrakoot, Uttar Pradesh

दैनिक धमाका पत्रिका ब्यूरो दैनिक धमाका पत्रिका की आधिकारिक संपादकीय टीम है, जो पाठकों तक सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय समाचार पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा उद्देश्य जिम्मेदार पत्रकारिता, पारदर्शिता और सत्यपरक रिपोर्टिंग के माध्यम से जनहित के मुद्दों को प्रमुखता से उठाना है।

सभी पोस्ट देखें

अपनी राय व्यक्त करें (कमेंट्स)

पाठकों की प्रतिक्रियाएं

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं है। अपनी राय साझा करें!


जिला समाचार

📆 महीने के अनुसार संग्रह