चित्रकूट में बेखौफ अवैध खनन: तीर धूमाई में NGT नियमों की धज्जियां, प्रशासन की आंखों पर पट्टी
चित्रकूट में बेखौफ अवैध खनन: तीर धूमाई में NGT नियमों की धज्जियां, प्रशासन की आंखों पर पट्टी
चित्रकूट। उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जनपद में कानून का राज सिर्फ कागजों पर नजर आ रहा है। जनपद की राजापुर तहसील अंतर्गत तीर धूमाई चांदी खंड संख्या-3 इन दिनों अवैध खनन और ओवरलोड वाहनों के परिवहन का सेफ अड्डा बनता जा रहा है। हालात ये हैं कि जहां राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के सख्त दिशा-निर्देश लागू होने चाहिए, वहां जमीनी हकीकत में खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
स्थानीय लोगों और विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, खदान संचालक की मनमानी इस हद तक बढ़ चुकी है कि दिन-रात धड़ल्ले से अवैध खनन किया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि यह सब कथित तौर पर खनिज और राजस्व विभाग के अधिकारियों के संरक्षण में हो रहा है। आरोप है कि सरकारी खजाने में जाने वाली लाखों रुपये की राजस्व राशि रोजाना 'सेटिंग' की भेंट चढ़ रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि बालू से लदे ओवरलोड वाहन क्षेत्र की सड़कों को लगातार नुकसान पहुंचा रहे हैं, लेकिन प्रशासन की नजर इस ओर से पूरी तरह से मूंदी हुई है। आश्चर्य इस बात का है कि जहां फोटो और वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि बड़े-बड़े ओवरलोड बालू के वाहन निर्बाध रूप से निकल रहे हैं, वहीं खनिज इंस्पेक्टर और खनिज अधिकारी की रिपोर्ट में हमेशा सब कुछ सामान्य पाया जाता है। यह दोहरा खेल पूरे सिस्टम पर बड़े सवाल खड़े करता है।
"रिपोर्ट में सब सही, जमीन पर बेरहमी"
यह एक खुला रहस्य है कि खनिज विभाग की जांच रिपोर्ट और जमीनी सच्चाई में जमीन-आसमान का अंतर है। जहां अवैध खनन से हर रोज सरकार को सीधी हानि पहुंचाई जा रही है, वहीं विभागीय अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध नजर आती है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि खदान संचालकों और विभाग के बीच की सांठगांठ है, जिसके चलते यहां कानून का उल्लंघन इतना सहज है।
NGT के नियमों की अनदेखी
बता दें कि NGT द्वारा बालू खनन को लेकर कड़े पर्यावरणीय मानक तय किए गए हैं, जिनमें खनन की समय सीमा, वाहनों की क्षमता और गहराई के नियम शामिल हैं। तीर धूमाई क्षेत्र में इन सभी मानकों को ताक पर रख दिया गया है। यदि जल्द ही जिला प्रशासन ने इस ओर संज्ञान नहीं लिया, तो न केवल पर्यावरण को अपूरणीय क्षति होगी, बल्कि सरकार का राजस्व भी लगातार लूटा जाता रहेगा।
प्रशासन की चुप्पी से सवाल
जब खुद अधिकारियों को नियमों का उल्लंघन "दिखता ही नहीं", तो आम जनता किससे न्याय की उम्मीद करे? प्रशासन की इस चुप्पी ने इलाके में अवैध खनन माफियाओं के हौसले बुलंद कर दिए हैं। आवश्यकता इस बात की है कि जिलाधिकारी चित्रकूट तत्काल मामले का संज्ञान लें और दोषी अधिकारियों व संचालकों पर कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित करें।
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