चित्रकूट में पॉलिथीन पर सख्ती: SDM मऊ ने बाजार में मारा छापा, 22 दुकानदारों पर 14,700 रुपये का जुर्माना, फुटपाथ पर कब्जा करने वालों को चेतावनी
चित्रकूट में पॉलिथीन पर सख्ती: SDM मऊ ने बाजार में मारा छापा, 22 दुकानदारों पर 14,700 रुपये का जुर्माना, फुटपाथ पर कब्जा करने वालों को चेतावनी
चित्रकूट, 04 जुलाई 2026। जिले में प्लास्टिक उन्मूलन महा-अभियान (PUMA 5.0) के तहत शुक्रवार को उप जिलाधिकारी मऊ के नेतृत्व में नगर पंचायत और पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीम ने बाजार रोड और बस स्टैंड क्षेत्र में विशेष जांच अभियान चलाया। इस दौरान 22 दुकानों से प्रतिबंधित पॉलिथीन बरामद हुई, जिस पर दुकानदारों के खिलाफ कुल 14,700 रुपये का अर्थदंड लगाया गया। सड़क और फुटपाथ पर सामान रखकर रास्ता रोकने वालों को भी कड़ी चेतावनी दी गई।
सुबह करीब 11 बजे एसडीएम मऊ की अगुवाई में टीम जब बस स्टैंड के पास पहुँची तो दुकानदारों में अफरातफरी मच गई। कई लोग पॉलिथीन छिपाने की कोशिश करते दिखे, लेकिन टीम ने एक-एक दुकान की गहन जाँच की। जिन दुकानदारों के यहाँ प्रतिबंधित पॉलिथीन मिली, उनका मौके पर ही चालान काटा गया और पॉलिथीन जब्त कर ली गई। अधिकारियों ने बताया कि यह अभियान 1 जुलाई से शुरू होकर 12 जुलाई तक चलेगा।
उप जिलाधिकारी ने साफ शब्दों में कहा कि प्रतिबंधित पॉलिथीन के खिलाफ यह अभियान सिर्फ दिखावे के लिए नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में अगर कोई दुकानदार दोबारा प्रतिबंधित पॉलिथीन का इस्तेमाल करता पाया गया तो उसके खिलाफ नियमानुसार और भी सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने व्यापारियों और आम नागरिकों से अपील की कि वे कपड़े के थैले और अन्य पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों को अपनाएँ।
प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद एक स्वाभाविक सवाल उठ रहा है—क्या 22 दुकानदारों पर कुल 14,700 रुपये का जुर्माना प्रतिबंधित पॉलिथीन के खिलाफ प्रभावी संदेश देने के लिए पर्याप्त है? एक तरफ प्रशासन पॉलिथीन मुक्त चित्रकूट का नारा दे रहा है, दूसरी तरफ जुर्माने की रकम देखकर लगता है कि दुकानदारों के लिए यह महज एक छोटी सी कीमत बनकर रह जाए। सवाल यह भी है कि जो पॉलिथीन जब्त की गई, वह आखिर बाजार तक पहुँचती कैसे है? क्या प्रशासन उस सप्लाई चेन पर भी नज़र रख रहा है जो शहर तक प्रतिबंधित पॉलिथीन ला रही है?
यह कोई पहला मौका नहीं है जब चित्रकूट में पॉलिथीन के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा हो। इससे पहले भी PUMA के कई चरण आ चुके हैं। हर बार कुछ दुकानदार पकड़े जाते हैं, जुर्माना वसूला जाता है, और फिर सब कुछ पहले जैसा चलने लगता है। ऐसे में जनता का सवाल है कि क्या PUMA 5.0 भी पिछले अभियानों की तरह एक अस्थायी कवायद बनकर रह जाएगा, या इस बार वाकई कुछ स्थायी बदलाव देखने को मिलेगा? प्रशासन ने अगर सप्लाई चेन पर शिकंजा नहीं कसा और जुर्माने की रकम को नहीं बढ़ाया तो यह अभियान भी कागजी कार्रवाई बनकर रह सकता है।
जिला समाचार
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