RBI ने ₹10-20 के प्लास्टिक नोटों की दी हरी झंडी? कागज के नोट होंगे बंद? पूरा प्लान पढ़ें
RBI ने ₹10-20 के प्लास्टिक नोटों की दी हरी झंडी? कागज के नोट होंगे बंद? पूरा प्लान पढ़ें
क्या आप जानते हैं भारत में 23 अरब से अधिक कागज के नोट हर वर्ष ख़राब होते हैं इस समस्या को ख़त्म करने के लिए आरबीआई एक बार फिर 14 साल पुराने प्लास्टिक (पॉलीमर) नोटों को बनाने पर विचार करना शुरू कर दिया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार में पटना और मुंबई में हुई बैठक में आरबीआई ने ₹10 और ₹20 के पायलट प्रोजेक्ट की मंजूरी पर चर्चा की। इस लेख में हम प्लास्टिक के नोटो के फायदे और नुकसान, दुनिया में उनकी सफलता और भारत में इस योजना के भविष्य का विश्लेषण करेंगे।
क्या है प्लास्टिक नोट? BOPP तकनीक
प्लास्टिक के नोट, जिन्हें हम पॉलीमर नोट भी कहते हैं, ये कागज की जगह एक पतली, लचीली प्लास्टिक फिल्म बायएक्सियली ओरिएंटेड पॉलीप्रोपाइलीन (BOPP) से बनाये जाते है । ये पानी में गीले नहीं होते हैं, गंदे नहीं होते, फटते नहीं हैं और नकली बनाना मुश्किल होता है कागज के नोट औसतन 1-2 साल में बेकार हो जाते हैं, जबकि प्लास्टिक के नोट 4 -5 साल तक चलते हैं। भारत में हजारो करोड़ रुपये सिर्फ पुराने नोट को बदलने के लिए खर्च होते हैं - जो सबसे बड़ी समस्या है।
1960 के दशक में ऑस्ट्रेलिया में नकली नोटों की समस्या बहुत बढ़ गई, जिसके बाद 1968 में CSIRO (Commonwealth Scientific and Industrial Research Organisation) के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा नोट विकसित करना शुरू किया, जिसे नकली बनाना आसान न हो। पहला प्लास्टिक नोट (First Plastic Note) जनवरी 1988 में, ऑस्ट्रेलिया के द्विशताब्दी समारोह के अवसर पर पॉलीमर नोट (10 डॉलर) जारी किया गया और 1996 तक ऑस्ट्रेलिया ने अपने सभी कागज के नोट बदल दिए ऐसा करने वाला वह पहला देश बना । जिसके बाद रोमानिया ने 1999 में, वियतनाम ने 2001 में, यूके ने 2016 में प्लास्टिक के नोट प्रचलन में आये। जिसके बाद 60 से अधिक देशों ने इस तकनीक को अपनाया भारत भी 2013 में इस दिशा में आगे बढ़ा जब RBI ने पाँच शहरों जयपुर, मैसूर, शिमला, भुवनेश्वर और कोच्चि में ₹10 के पॉलीमर नोटों का पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने की हरी झंडी दी। हालाँकि, सरकार और RBI के बीच लागत बंटवारे को लेकर सहमति नहीं बन पाई और यह प्रयास रुक गया। जिसकी अब 2026 में एक बार फिर चर्चा की जा रही है।
आरबीआई की नवीनतम योजना और आगे की राह
वित्तीय वर्ष 2023-24 में आर बी आई को पुराने नोटो की जगह नए नोट छापने के लिए ₹5,101.4 करोड़ रूपये खर्च हुए लेकिन 2024-25 में लगभग 25% वृद्धि के साथ ₹6,372.8 करोड़ रुपए खर्च करने पड़े जो पिछले वर्ष से ₹1,271.4 करोड़ अधिक है इसी समस्या को ख़त्म करने के लिए आर बीआई ने एक बार फिर 2026 में इस प्रस्ताव पर गंभीरता दिखाई है। हाल ही में पटना और मुंबई में हुई बोर्ड बैठकों में ₹10 और ₹20 के प्लास्टिक नोटों का पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने की योजना बनाई गई । शुरुआती चरण में – एटीएम अपग्रेड, नोट गिनने वाली मशीनों की अनुकूलता और जनता का नोटों के प्रति भरोसा और जागरूकता जैसी चुनौतियाँ अभी भी बनी हुई हैं। यदि यह परीक्षण सफल रहता है, तो आने वाले 2-3 सालों में भारत भी पॉलीमर नोटों की ओर बढ़ सकता है।
प्लास्टिक के नोट भारत के सामने बढ़ती नोट छपाई लागत और कागजी नोटों की कम उम्र जैसी समस्याओं का एक स्थायी समाधान हो सकते हैं। पॉलीमर तकनीक नकली नोटों पर भी लगाम लगाएगी और पर्यावरण पर बोझ कम करेगी। हालाँकि, एटीएम अपग्रेड, जनता की आदतें और उच्च प्रारंभिक लागत जैसी चुनौतियाँ अभी बाकी हैं। आरबीआई का पायलट प्रोजेक्ट एक सकारात्मक कदम है। यदि सब कुछ ठीक रहा, तो अगले कुछ वर्षों में हमारे बटुए में प्लास्टिक के नोट देखना आम बात हो जाएगी। आप क्या सोचते हैं – क्या भारत को प्लास्टिक नोट अपना लेने चाहिए?
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
क्या प्लास्टिक के नोट पेपर के नोटों से बेहतर हैं?
उत्तर : हां, अधिकांश मामलों में। वे ज़्यादा टिकाऊ, सुरक्षित और साफ होते हैं।
क्या प्लास्टिक के नोटों को फाड़ा जा सकता है?
उत्तर : पेपर नोटों के मुकाबले इन्हें फाड़ना बहुत मुश्किल होता है। ये काफी मजबूत होते हैं।
क्या प्लास्टिक के नोट पानी में खराब हो जाते हैं?
उत्तर : नहीं, ये जलरोधक (waterproof) होते हैं और पानी में खराब नहीं होते।
क्या प्लास्टिक के नोटों को रिसाइकिल किया जा सकता है?
उत्तर : हां, लेकिन इसके लिए विशेष रिसाइक्लिंग सुविधाओं की आवश्यकता होती है।
क्या भारत में प्लास्टिक के नोट चलन में हैं?
उत्तर : फिलहाल (2026 तक) नहीं। RBI एक पायलट प्रोजेक्ट पर विचार कर रहा है, लेकिन अभी तक ये नोट जारी नहीं किए गए हैं।
प्लास्टिक नोट से क्या फायदा है?
उत्तर : इनकी उम्र लंबी होती है, ये नकली बनाना मुश्किल होता है, गंदे नहीं होते, और लंबे समय में ये किफायती होते हैं।
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