नई दिल्ली (PIB)। नीति आयोग ने 02 मार्च 2026 को अपने राज्य सहायता मिशन (SSM) के अंतर्गत प्राकृतिक खेती विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला में देश के विभिन्न राज्यों से किसान, कृषि वैज्ञानिक, नीति निर्माता, स्टार्टअप, किसान उत्पादक संगठन (FPO) और नागरिक बड़ी संख्या में शामिल हुए।
कार्यक्रम के दौरान प्राकृतिक खेती पर हिंदी और अंग्रेज़ी में प्रशिक्षण नियमावली एवं सर्वोत्तम अभ्यास मार्गदर्शिका का शुभारंभ किया गया। इन पुस्तिकाओं का उद्देश्य किसानों, कृषि विस्तार अधिकारियों और जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं को क्षेत्र-विशिष्ट एवं व्यावहारिक जानकारी प्रदान करना है, जिससे प्राकृतिक खेती को व्यापक स्तर पर अपनाया जा सके।
राज्यपाल का संबोधन
गुजरात एवं महाराष्ट्र के राज्यपाल Acharya Devvrat ने वर्चुअल माध्यम से कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि टिकाऊ और किसान-केंद्रित कृषि प्रणाली समय की आवश्यकता है। उन्होंने मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार, रासायनिक इनपुट लागत में कमी और किसानों की आय में वृद्धि के लिए प्राकृतिक खेती को महत्वपूर्ण बताया।
प्रमुख संस्थानों की भागीदारी
कार्यक्रम में Junagadh Agricultural University, Dr YS Parmar University of Horticulture and Forestry तथा Gujarat Natural Farming Science University सहित कई प्रमुख शैक्षणिक एवं अनुसंधान संस्थानों ने सक्रिय भागीदारी की।
पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, केरल और ओडिशा के किसान एवं कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) के वैज्ञानिकों ने प्राकृतिक खेती के व्यावहारिक पहलुओं पर अपने अनुभव साझा किए।
केंद्रीय संस्थानों की सहभागिता
कार्यशाला में APEDA, NABARD, सहकारिता मंत्रालय, पशुपालन एवं डेयरी विभाग (DAHD), पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय तथा कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान (ATARI) के अधिकारियों ने अभिसरण, प्रमाणन, बाजार संपर्क और संस्थागत समर्थन जैसे विषयों पर अपने विचार रखे।
770 प्रतिभागियों ने की खुली चर्चा
कार्यशाला के पहले दिन आयोजित खुली चर्चा में 770 प्रतिभागियों ने भाग लिया। किसानों और विशेषज्ञों ने प्राकृतिक खेती अपनाने में आने वाली जमीनी चुनौतियों, प्रमाणन प्रक्रिया, बाजार उपलब्धता और वित्तीय समर्थन पर खुलकर संवाद किया। चर्चा के दौरान किसान-नेतृत्व मॉडल को बढ़ावा देने पर सहमति बनी।
दूसरे दिन प्रतिभागियों को जमीनी स्तर पर प्राकृतिक कृषि पद्धतियों का प्रत्यक्ष अवलोकन कराया गया। विभिन्न फसलों में प्राकृतिक तकनीकों के उपयोग, जैव-उपकरणों की तैयारी और स्वचालन प्रणालियों का प्रदर्शन किया गया।
प्रशिक्षण पुस्तिकाएं जारी
कार्यक्रम के अंत में प्राकृतिक खेती से संबंधित प्रशिक्षण टूलकिट एवं सर्वोत्तम अभ्यास मार्गदर्शिका (हिंदी एवं अंग्रेज़ी) जारी की गई, जिससे देशभर में प्राकृतिक खेती के लिए एक सशक्त ज्ञान आधार तैयार हो सके।




टिप्पणियाँ (0)
कोई टिप्पणी नहीं। सबसे पहले टिप्पणी करें!
एक टिप्पणी लिखें
आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा। आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *