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UP पंचायत चुनाव 2026 टले, कैबिनेट ने OBC आयोग को दी मंजूरी; हाईकोर्ट की सुनवाई से पहले बड़ा दांव

| Lucknow, Uttar Pradesh | May 18, 2026, 02:01 PM IST WhatsApp
UP पंचायत चुनाव 2026 टले, कैबिनेट ने OBC आयोग को दी मंजूरी; हाईकोर्ट की सुनवाई से पहले बड़ा दांव

लखन। पंचायत चुनावों को लेकर उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने आज एक निर्णायक फैसला लेते हुए ‘अन्य पिछड़ा वर्ग’ (OBC) आरक्षण के लिए एक समर्पित आयोग के गठन को मंजूरी दे दी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई विस्तारित कैबिनेट बैठक में लिए गए इस निर्णय ने प्रदेश में पंचायत चुनावों का रोडमैप लगभग साफ कर दिया है। वर्तमान पंचायतों का कार्यकाल 25-26 मई को समाप्त हो रहा है, लेकिन इस आयोग के गठन और इसकी अनिवार्य प्रक्रिया के चलते अब जून या जुलाई में चुनाव कराना तो दूर, वर्ष 2026 में भी चुनाव होने की संभावना लगभग समाप्त हो गई है। विशेषज्ञों की मानें तो अब ये चुनाव 2027 के विधानसभा चुनाव के बाद ही हो पाएंगे।

क्या है कैबिनेट का फैसला?

प्रदेश सरकार ने जिस आयोग के गठन पर मुहर लगाई है, उसका औपचारिक नाम ‘उत्तर प्रदेश राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग’ होगा। यह 5 सदस्यीय आयोग होगा जिसके अध्यक्ष सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीश होंगे। आयोग को कार्य पूरा करने के लिए 6 महीने का समय दिया गया है, जिसे जरूरत पड़ने पर बढ़ाया भी जा सकता है। इसका मुख्य काम ग्राम, क्षेत्र और जिला पंचायतों में OBC समुदाय के सामाजिक, शैक्षिक और राजनीतिक पिछड़ेपन का गहन अनुभवजन्य अध्ययन करना और आरक्षण के सही प्रतिशत की अनुशंसा करना होगा।

आखिरी वक्त पर क्यों आया फैसला?

इस फैसले के पीछे की असली वजह इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित अवमानना का मामला है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के ‘ट्रिपल टेस्ट’ फॉर्मूले के तहत बिना समर्पित आयोग की अनुशंसा के स्थानीय निकायों में OBC आरक्षण लागू नहीं किया जा सकता। सरकार ने फरवरी 2026 में हाईकोर्ट को एक हलफनामा देकर आश्वासन दिया था कि वह जल्द ही आयोग का गठन करेगी। लेकिन देरी होने पर अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए पंचायती राज विभाग के प्रमुख सचिव को अवमानना का नोटिस जारी कर दिया और कल यानी 19 मई 2026 को अगली सुनवाई की तारीख तय की। कानूनी जानकारों का कहना है कि सुनवाई से ठीक एक दिन पहले लिया गया कैबिनेट का यह निर्णय सरकार को अवमानना की कार्रवाई से बचाने में कारगर साबित हो सकता है।

क्या जून-जुलाई में चुनाव संभव हैं? – विशेषज्ञों की राय

इस सवाल पर वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक और संवैधानिक मामलों के जानकार डॉ. अवधेश कुमार सिंह का कहना है, “जून-जुलाई में चुनाव कराना एक प्रशासनिक और कानूनी असंभवता है। पहले आयोग का औपचारिक गठन होगा, जिसमें 2-3 हफ्ते लगेंगे। फिर इसे पूरे प्रदेश में OBC समुदाय के पिछड़ेपन का ‘रैपिड सर्वे’ करना होगा। 2021 में हुए इसी तरह के सर्वे में लगभग 4-5 महीने का वक्त लगा था। रिपोर्ट आने के बाद राज्य निर्वाचन आयोग को परिसीमन और सीटों का आरक्षण तय करने की प्रक्रिया में कम-से-कम 60 दिन और लगेंगे। इस हिसाब से यह प्रक्रिया दिसंबर 2026 से पहले पूरी हो ही नहीं सकती। और फरवरी-मार्च 2027 में विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लगने के कारण पंचायत चुनाव की एकमात्र विंडो विधानसभा चुनाव के बाद ही बचती है।”

प्रशासक शासन का रास्ता साफ

मौजूदा पंचायतों का पांच साल का कार्यकाल 25-26 मई 2026 को खत्म हो रहा है। ऐसे में सरकार के सामने एकमात्र संवैधानिक विकल्प प्रशासकों की नियुक्ति करना ही बचता है। शासन के सूत्रों के अनुसार, कार्यकाल समाप्त होते ही सभी ग्राम, क्षेत्र और जिला पंचायतों में प्रभारी प्रशासक नियुक्त कर दिए जाएंगे और विकास कार्यों के लिए उन्हें सीमित वित्तीय अधिकार दिए जाएंगे। प्रदेश में इससे पहले 2015 और 2020-21 में भी कई महीनों तक प्रशासक राज लागू रहा है।

राजनीतिक गलियारों में क्या है चर्चा?

राजनीतिक गलियारों में इस फैसले को विधानसभा चुनाव 2027 से जोड़कर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि भाजपा पंचायत चुनावों को ‘मिनी रेफरेंडम’ में तब्दील नहीं होने देना चाहती। 2021 के पंचायत चुनावों में बड़ी जीत के बावजूद विधानसभा चुनाव 2022 में पार्टी को कड़ी टक्कर मिली थी। यही वजह है कि इस बार विपक्ष को जमीनी माहौल बनाने का कोई मौका दिए बिना सीधे विधानसभा चुनावों पर ध्यान केंद्रित करने की रणनीति अपनाई गई है। वहीं, विपक्षी दल इसे सरकार की ‘लोकतंत्र विरोधी मानसिकता’ और जनता के अधिकारों पर हमला बता रहे हैं। समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता ने इसे ‘प्रशासनिक अराजकता’ करार दिया है।

SK NISHAD

Founder & Editor-in-Chief Uttar Pradesh , Lucknow
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My name is SK Nishad, the Founder of Dainik Dhamaka Patrika, a digital news platform dedicated to delivering accurate, reliable, and impactful news to the public. I am committed to responsible journalism and strive to highlight important issues with honesty, transparency, and integrity.
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