यूपी पंचायत चुनाव 2026: आरक्षण रिपोर्ट और हाईकोर्ट की समयसीमा से बढ़ा सस्पेंस
यूपी पंचायत चुनाव 2026: आरक्षण रिपोर्ट और हाईकोर्ट की समयसीमा से बढ़ा सस्पेंस
फतेहपुर। उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव 2026 को लेकर जारी सस्पेंस के बीच उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने बड़ा बयान दिया। फतेहपुर में रेड क्रॉस सोसाइटी बिल्डिंग का उद्घाटन करने पहुंचे उपमुख्यमंत्री ने कहा कि पंचायत चुनाव समय पर होंगे और सरकार की पूरी तैयारी है। उन्होंने यह भी कहा कि मामला अदालत में विचाराधीन है, लेकिन चुनाव कराने में कोई देरी नहीं होगी।
उप उपमुख्यमंत्री ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि जब विपक्षी जीतते हैं तो ईवीएम को सही बताते हैं और हारने पर उसी मशीन को खराब कहते हैं। उन्होंने समाजवादी पार्टी पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि सपा सरकार में नारा था — खाली प्लॉट हमारा है। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सपा जाति और धर्म के आधार पर वोट मांगती है और बिना गठजोड़ के एक पार्षदी या प्रधानी तक नहीं जीत सकती।
उन्होंने विपक्षी नेताओं के विदेश दौरों पर भी तंज कसते हुए कहा कि सत्ता कोई प्रॉपर्टी नहीं है, जिसे वसीयत या परिवार के आधार पर ट्रांसफर कर दिया जाए। सत्ता का फैसला जनता करती है। उन्होंने विपक्षी दलों पर आरोप लगाया कि वे जनता की समस्याओं से दूर रहकर केवल जातीय समीकरणों पर राजनीति करते हैं।
इलाहाबाद हाईकोर्ट पहले ही सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को निर्देश दे चुका है कि पंचायत चुनाव संवैधानिक समयसीमा में कराए जाएं। कोर्ट ने साफ किया है कि प्रधानों और पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल बढ़ाने का कोई प्रावधान नहीं है। ऐसे में सरकार पर दबाव है कि चुनाव 26 मई 2026 से पहले कराए जाएं। उपमुख्यमंत्री का बयान इसी संदर्भ में आया है, जिससे संकेत मिलता है कि सरकार चुनाव कार्यक्रम जल्द घोषित कर सकती है।
ब्रजेश पाठक का यह बयान न केवल पंचायत चुनाव को लेकर सरकार की तैयारी को दर्शाता है, बल्कि विपक्ष पर हमले से यह भी साफ होता है कि चुनावी माहौल पहले से ही गरम हो चुका है। पंचायत चुनाव की टाइमिंग और आरक्षण रिपोर्ट की चुनौती सीधे तौर पर ग्रामीण राजनीति और आगामी 2027 विधानसभा चुनावों की रणनीति पर असर डाल सकती है।
उप उपमुख्यमंत्री ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि जब विपक्षी जीतते हैं तो ईवीएम को सही बताते हैं और हारने पर उसी मशीन को खराब कहते हैं। उन्होंने समाजवादी पार्टी पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि सपा सरकार में नारा था — खाली प्लॉट हमारा है। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सपा जाति और धर्म के आधार पर वोट मांगती है और बिना गठजोड़ के एक पार्षदी या प्रधानी तक नहीं जीत सकती।
उन्होंने विपक्षी नेताओं के विदेश दौरों पर भी तंज कसते हुए कहा कि सत्ता कोई प्रॉपर्टी नहीं है, जिसे वसीयत या परिवार के आधार पर ट्रांसफर कर दिया जाए। सत्ता का फैसला जनता करती है। उन्होंने विपक्षी दलों पर आरोप लगाया कि वे जनता की समस्याओं से दूर रहकर केवल जातीय समीकरणों पर राजनीति करते हैं।
इलाहाबाद हाईकोर्ट पहले ही सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को निर्देश दे चुका है कि पंचायत चुनाव संवैधानिक समयसीमा में कराए जाएं। कोर्ट ने साफ किया है कि प्रधानों और पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल बढ़ाने का कोई प्रावधान नहीं है। ऐसे में सरकार पर दबाव है कि चुनाव 26 मई 2026 से पहले कराए जाएं। उपमुख्यमंत्री का बयान इसी संदर्भ में आया है, जिससे संकेत मिलता है कि सरकार चुनाव कार्यक्रम जल्द घोषित कर सकती है।
ब्रजेश पाठक का यह बयान न केवल पंचायत चुनाव को लेकर सरकार की तैयारी को दर्शाता है, बल्कि विपक्ष पर हमले से यह भी साफ होता है कि चुनावी माहौल पहले से ही गरम हो चुका है। पंचायत चुनाव की टाइमिंग और आरक्षण रिपोर्ट की चुनौती सीधे तौर पर ग्रामीण राजनीति और आगामी 2027 विधानसभा चुनावों की रणनीति पर असर डाल सकती है।
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