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हर वक्त की थकान, चिड़चिड़ापन और याददाश्त की गड़बड़ी — हो सकता है आपके शरीर में 'एनर्जी विटामिन' की भारी कमी हो

| Lucknow, Uttar Pradesh | May 20, 2026, 02:30 AM IST WhatsApp
हर वक्त की थकान, चिड़चिड़ापन और याददाश्त की गड़बड़ी — हो सकता है आपके शरीर में 'एनर्जी विटामिन' की भारी कमी हो

कुछ दिन पहले हमारे ऑफिस में काम करने वाले रमेश भाई अचानक बीमार पड़ गए। बुखार तो मामूली था, लेकिन उठने-बैठने में चक्कर आते थे और जीभ पर छाले पड़ गए थे। डॉक्टर ने जब जाँच रिपोर्ट देखी तो चौंक गए। उनका विटामिन B12 का स्तर इतना गिर चुका था कि तुरंत इंजेक्शन की ज़रूरत पड़ी। रमेश भाई हैरान — खाना तो पूरा खाते हैं, फिर ऐसा क्यों?

डॉक्टर का जवाब था — "आप शाकाहारी हैं न? यही सबसे बड़ी वजह है।" और ये समस्या सिर्फ रमेश भाई की नहीं है। आज पूरे भारत में शाकाहारी लोगों में विटामिन B12 की कमी एक आम बात हो गई है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) की एक रिपोर्ट के अनुसार, देश के करीब 60 से 80 प्रतिशत लोगों में विटामिन B12 का स्तर सामान्य से कम पाया गया है। सबसे हैरान करने वाली बात ये है कि इस कमी का पता अक्सर तब चलता है जब शरीर काफी नुकसान झेल चुका होता है।


क्या है ये विटामिन B12 और शरीर के लिए क्यों ज़रूरी है?

विटामिन B12, जिसे वैज्ञानिक भाषा में कोबालामिन (Cobalamin) कहा जाता है, हमारे शरीर के लिए एक बेहद ज़रूरी पोषक तत्व है। ये पानी में घुलने वाला विटामिन है और इसका सबसे अहम काम है — लाल रक्त कोशिकाओं (Red Blood Cells) का निर्माण करना और नर्वस सिस्टम को सही रखना।

अगर सीधी भाषा में कहें तो ये वो 'तेल' है जो हमारे दिमाग और नसों की मशीनरी को सुचारू रूप से चलाता रहता है। इसके अलावा ये DNA बनाने में भी मदद करता है और शरीर में एनर्जी बनाए रखता है। यही वजह है कि इसे अक्सर 'एनर्जी विटामिन' भी कहा जाता है।

लेकिन यहाँ एक पेंच है। ये विटामिन प्राकृतिक रूप से सिर्फ जानवरों से मिलने वाले भोजन में ही पाया जाता है — जैसे माँस, मछली, अंडा, दूध। पेड़-पौधों में ये बिल्कुल नहीं होता। यही कारण है कि शाकाहारी लोगों में इसकी कमी सबसे ज़्यादा देखी जाती है।


शरीर देता है ये सात चेतावनी, नज़रअंदाज़ करना पड़ेगा भारी

विटामिन B12 की कमी के लक्षण धीरे-धीरे सामने आते हैं और अक्सर लोग इन्हें दूसरी बीमारियाँ समझ लेते हैं। लेकिन अगर नीचे दिए गए लक्षणों में से कोई भी दिखे तो तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए:

  • हर वक्त थकान और कमज़ोरी: पूरी नींद के बाद भी शरीर में एनर्जी नहीं रहती। सीढ़ियाँ चढ़ने में साँस फूलने लगती है।
  • स्किन का रंग पीला पड़ना: खून की कमी (एनीमिया) के कारण चेहरा और आँखों के नीचे का हिस्सा पीला हो जाता है।
  • हाथ-पैरों में झुनझुनी या सुन्नपन: नसों पर असर पड़ने से पैरों में जलन, सुई चुभने जैसा एहसास होता है।
  • चिड़चिड़ापन और मूड स्विंग: छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आना या बिना किसी कारण उदास रहना।
  • याददाश्त की कमज़ोरी: चीज़ें भूलना, किसी काम में ध्यान न लगा पाना।
  • जीभ और मुँह के छाले: जीभ लाल, चिकनी और सूजी हुई लगती है। बार-बार मुँह के छाले होना।
  • धुंधला दिखना: आँखों की नसें प्रभावित होने से नज़र पर असर पड़ता है।

डॉक्टरों का कहना है कि अगर इन लक्षणों को अनदेखा किया गया तो नसें स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त हो सकती हैं और याददाश्त की कमी स्थायी भी हो सकती है।


शाकाहारी हैं तो क्या खाएँ?

सबसे बड़ी परेशानी शाकाहारियों के लिए है, क्योंकि विटामिन B12 का कोई भी प्राकृतिक पौधा-आधारित स्रोत नहीं है। लेकिन चिंता की बात नहीं, कुछ रास्ते हैं:

आहार शाकाहारी/मांसाहारी टिप्पणी
दूध, दही, पनीर शाकाहारी शाकाहारियों के लिए सबसे अच्छा विकल्प। रोज़ एक गिलास दूध या एक कटोरी दही ज़रूर लें।
अंडा (खासकर पीली ज़र्दी) अंडाहारी रोज़ एक अंडा खाने से दिन भर की ज़रूरत का एक बड़ा हिस्सा पूरा हो जाता है।
फोर्टिफाइड अनाज और सोया मिल्क शाकाहारी बाज़ार में 'B12 फोर्टिफाइड' लिखा हुआ नाश्ता अनाज, टोफू और सोया दूध उपलब्ध है।
मछली (सैल्मन, टूना) मांसाहारी B12 का सबसे शक्तिशाली स्रोत। हफ्ते में दो बार खाएँ।
कलेजी (Liver) मांसाहारी मात्रा बहुत कम लगती है, लेकिन सबसे ज़्यादा B12 इसमें ही मिलता है।
न्यूट्रिशनल यीस्ट शाकाहारी (वीगन) ये एक खास तरह का खमीर है जिसे सब्ज़ी या सलाद पर छिड़क कर खा सकते हैं।

ध्यान रखने वाली बात ये है कि शरीर में विटामिन B12 को अवशोषित करने के लिए पेट में पर्याप्त मात्रा में एक खास प्रोटीन (इंट्रिंसिक फैक्टर) का होना ज़रूरी है। कई बार पेट की बीमारियों के कारण ये प्रोटीन कम बनता है और खाने से विटामिन नहीं चढ़ता। ऐसे मामलों में सिर्फ इंजेक्शन ही कारगर होता है।


नवीनतम अपडेट: क्या कहती है रिसर्च?

1. बुज़ुर्गों में डिमेंशिया और B12 का कनेक्शन: हाल ही में AIIMS दिल्ली के एक अध्ययन में पाया गया कि जिन बुज़ुर्गों में विटामिन B12 का स्तर लगातार कम रहता है, उनमें डिमेंशिया और अल्ज़ाइमर जैसी बीमारियों का खतरा तीन गुना तक बढ़ जाता है।

2. गर्भवती महिलाओं पर खतरा: ICMR की एक रिपोर्ट के अनुसार, गर्भावस्था में B12 की कमी से गर्भ में पल रहे शिशु के दिमागी विकास पर बुरा असर पड़ सकता है। डॉक्टर अब गर्भवती महिलाओं को नियमित B12 जाँच की सलाह दे रहे हैं।

3. मल्टीविटामिन का बाज़ार गर्म: कोरोना के बाद से इम्यूनिटी और एनर्जी बढ़ाने वाले मल्टीविटामिन कैप्सूल की बिक्री कई गुना बढ़ गई है। लेकिन विशेषज्ञ साफ कहते हैं कि बिना जाँच कराए कोई भी सप्लीमेंट लेना नुकसानदेह हो सकता है।


परीक्षार्थियों के लिए (Exam Corner)

SSC, UPSC और UPPSC में विटामिन B12 से जुड़े ये सवाल बार-बार आते हैं:

सवाल 1: विटामिन B12 का रासायनिक नाम क्या है?
जवाब: कोबालामिन (Cobalamin)।

सवाल 2: विटामिन B12 की कमी से कौन सा रोग होता है?
जवाब: पर्नीशियस एनीमिया (Pernicious Anemia) और नर्वस सिस्टम डैमेज।

सवाल 3: विटामिन B12 प्राकृतिक रूप से किसमें नहीं पाया जाता?
जवाब: पेड़-पौधों में। ये केवल जानवरों से प्राप्त आहार में पाया जाता है।

सवाल 4: शाकाहारी लोगों को B12 की कमी ज़्यादा क्यों होती है?
जवाब: क्योंकि पौधों से मिलने वाले भोजन में विटामिन B12 नहीं होता।

सवाल 5: कौन से विटामिन पानी में घुलनशील होते हैं?
जवाब: विटामिन B कॉम्प्लेक्स और विटामिन C।


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Disclaimer: यह लेख इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR), विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और चिकित्सा विशेषज्ञों की सलाह पर आधारित है। यह केवल सामान्य जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से है। कोई भी दवा या सप्लीमेंट शुरू करने से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।

SK NISHAD

Founder & Editor-in-Chief Uttar Pradesh , Lucknow
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My name is SK Nishad, the Founder of Dainik Dhamaka Patrika, a digital news platform dedicated to delivering accurate, reliable, and impactful news to the public. I am committed to responsible journalism and strive to highlight important issues with honesty, transparency, and integrity.
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