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UN का बड़ा एक्शन: तीन जानलेवा सिंथेटिक ड्रग्स पर लगा प्रतिबंध, कोका पत्ता पर नियंत्रण बरकरार

UN का बड़ा एक्शन: तीन जानलेवा सिंथेटिक ड्रग्स पर लगा प्रतिबंध, कोका पत्ता पर नियंत्रण बरकरार

UN का बड़ा एक्शन: तीन जानलेवा सिंथेटिक ड्रग्स पर लगा प्रतिबंध, कोका पत्ता पर नियंत्रण बरकरार

नई दिल्ली दुनिया भर में नशीले पदार्थों का खतरा लगातार बदल रहा है। हर दिन कोई नया सिंथेटिक ड्रग बाजार में आ रहा है, जिसके बारे में न तो लोग जानते हैं और न ही कानून व्यवस्था। इनमें से कई तो इतने खतरनाक होते हैं कि एक ही खुराक इंसान की जान ले सकती है।

अब संयुक्त राष्ट्र ने ऐसे ही तीन जानलेवा नशीले पदार्थों को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया है। संयुक्त राष्ट्र की नारकोटिक ड्रग्स कमीशन (CND) ने WHO की सलाह पर यह फैसला लिया है। अब दुनिया के सभी देशों को इन ड्रग्स पर कड़ा नियंत्रण लागू करना होगा।

कौन से हैं वो तीन पदार्थ?

पहला – N-pyrrolidino isotonitazene
यह एक सिंथेटिक ओपिओइड है, यानी ऐसा रसायन जो अफीम की तरह काम करता है। यह इतना ताकतवर है कि थोड़ी सी मात्रा में भी ओवरडोज हो सकता है और मौत हो सकती है। यह अक्सर नकली दवाइयों की गोलियों में मिलाया जाता है, जिससे लोग समझ ही नहीं पाते कि वे जानलेवा पदार्थ ले रहे हैं।

दूसरा – N-desethyl etonitazene
यह भी एक सिंथेटिक ओपिओइड ही है। यह पीले या भूरे पाउडर के रूप में मिलता है। यह भी ओवरडोज और मौतों से जुड़ा है। WHO के मुताबिक, इसका कोई चिकित्सीय उपयोग नहीं है – मतलब यह सिर्फ नुकसान पहुँचाने के लिए बनाया गया है।

तीसरा – MDMB-FUBINACA
यह एक सिंथेटिक कैनाबिनोइड है। असली भांग से इसका कोई लेना-देना नहीं – यह पूरी तरह लैब में बनाया जाता है। यह सफेद पाउडर के रूप में मिलता है। लोग इसे हर्बल उत्पादों पर स्प्रे करके सुखाते हैं और फिर वेप (ई-सिगरेट) की तरह पीते हैं। इसके गंभीर दुष्प्रभाव होते हैं और कई लोग इससे जहर खा चुके हैं।

संयुक्त राष्ट्र ने पहले दो पदार्थों को 1961 कन्वेंशन की अनुसूची I में और तीसरे को 1971 कन्वेंशन की अनुसूची II में डाल दिया है। अब इनका उत्पादन, बिक्री, कब्जा और आयात-निर्यात सभी देशों में गैरकानूनी होगा।

कोका पत्ता पर क्या फैसला हुआ?

यह सबसे दिलचस्प हिस्सा है। WHO ने 30 साल से अधिक समय में पहली बार कोका पत्ता पर व्यापक वैज्ञानिक समीक्षा की। कोका पत्ता दक्षिण अमेरिका – खासकर एंडियन क्षेत्र – के स्वदेशी समुदायों के लिए सदियों से एक सांस्कृतिक और परंपरागत चीज रही है। वे इसे चबाते हैं और इसकी चाय पीते हैं।

WHO की समीक्षा में पाया गया कि पारंपरिक तरीके से कोका पत्ता चबाने या उसकी चाय पीने से कोई बड़ा सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिम नहीं है। इसका गहरा सांस्कृतिक महत्व है।

लेकिन साथ ही, WHO ने यह भी देखा कि कोका पत्ता से कोकीन बनाना बहुत आसान और फायदेमंद है। आज दुनिया भर में कोकीन का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। कोका की खेती लगातार बढ़ रही है।

इसलिए ECDD (WHO की विशेषज्ञ समिति) ने निष्कर्ष दिया कि कोका पत्ता को अंतरराष्ट्रीय नियंत्रण में रहने देना चाहिए। मतलब इसे 1961 कन्वेंशन की अनुसूची I में बरकरार रखा जाए। इससे अवैध कोकीन उत्पादन पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। साथ ही, जो देश अपने कानूनों के तहत पारंपरिक कोका पत्ता के इस्तेमाल की अनुमति देते हैं, उन्हें भी कोई रोक नहीं होगी।

खास बात यह है कि WHO ने कोका पत्ता की मौजूदा स्थिति में कोई बदलाव नहीं सुझाया था, इसलिए CND में किसी वोट की जरूरत भी नहीं पड़ी। यह सीधे-सीधे लागू हो गया।

WHO की क्या भूमिका है?

अंतरराष्ट्रीय ड्रग कंट्रोल संधियों के तहत, WHO एकमात्र ऐसी संस्था है जो साइकोएक्टिव पदार्थों की वैज्ञानिक और सार्वजनिक स्वास्थ्य समीक्षा कर सकती है। ECDD विशेषज्ञों की एक स्वतंत्र वैज्ञानिक सलाहकार समिति है। यह दुनिया भर में मौजूद पदार्थों के फार्माकोलॉजी, टॉक्सिकोलॉजी, एपिडेमियोलॉजी, लत की क्षमता और चिकित्सीय मूल्य की जाँच करती है। फिर यह CND को सिफारिश देती है कि किस पदार्थ पर अंतरराष्ट्रीय नियंत्रण लगाना चाहिए।

CND की 69वीं बैठक 9 से 13 मार्च 2026 को हुई, जिसमें सदस्य देशों ने WHO की इन सिफारिशों को समर्थन दिया।

देखिए भाई, ड्रग्स का खतरा अब सिर्फ भांग, अफीम या हेरोइन तक सीमित नहीं रह गया है। लैब में ऐसे रसायन बनाए जा रहे हैं जो असली ड्रग्स से कहीं ज्यादा ताकतवर और जानलेवा हैं। सबसे बड़ी समस्या यह है कि ये अक्सर नकली दवाइयों के रूप में बाजार में आते हैं। एक आम आदमी को पता ही नहीं चलता कि वह दर्द की गोली समझकर क्या खा रहा है।

संयुक्त राष्ट्र और WHO का यह कदम सही दिशा में है, लेकिन क्या यह काफी होगा? मुश्किल यह है कि जैसे ही एक पदार्थ प्रतिबंधित होता है, लैब में एक नया बना दिया जाता है – जिसका नाम भी कुछ अजीब होता है और कोई कानून उसे छू तक नहीं पाता।

कोका पत्ता का मामला अलग है। यहाँ वैज्ञानिकों ने सांस्कृतिक और पारंपरिक पहलुओं को भी देखा। यह एक संतुलित दृष्टिकोण है – एक तरफ एंडियन समुदायों की सदियों पुरानी परंपरा, दूसरी तरफ कोकीन के बढ़ते खतरे के बीच सही संतुलन बनाए रखना। WHO ने यह काम काफी हद तक सही किया है।

लेकिन यह भी सच है कि जब तक कोकीन की वैश्विक मांग बनी रहेगी, कोका पत्ता पर नियंत्रण रखना एक कठिन चुनौती बनी रहेगी। WHO ने आगे और शोध की सिफारिश की है। देखना होगा कि आने वाले सालों में इस दिशा में क्या नतीजे आते हैं।



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दैनिक धमाका पत्रिका ब्यूरो
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New Delhi, Delhi

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