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स्वास्थ्य

अब मलेरिया की खैर नहीं! WHO ने नवजातों के लिए लॉन्च की पहली खास दवा; 'अदृश्य' मलेरिया को पकड़ने वाली मशीन भी तैयार

SK NISHAD - Apr 25, 2026 09:19 AM IST 11 Views 0 0 Shares 0 Comments
अब मलेरिया की खैर नहीं! WHO ने नवजातों के लिए लॉन्च की पहली खास दवा; 'अदृश्य' मलेरिया को पकड़ने वाली मशीन भी तैयार

नई दिल्ली: 24 अप्रैल को 'विश्व मलेरिया दिवस' पर दुनिया के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने मलेरिया के खिलाफ जंग में दो ऐसे हथियार पेश किए हैं, जो सालों पुराने गैप को भरने वाले हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि अब 2 से 5 किलो वजन वाले उन मासूम बच्चों की जान भी बचाई जा सकेगी, जिनके लिए अब तक कोई सटीक दवा मौजूद नहीं थी।

1. नवजातों के लिए 'जादुई' दवा: अब डोज की गलती का डर खत्म

अभी तक होता यह था कि मलेरिया होने पर नवजात शिशुओं को वही दवा दी जाती थी जो बड़े बच्चों के लिए बनी होती थी। इसे तोड़-मरोड़ कर देने में डोज कम-ज्यादा होने का रिस्क रहता था, जिससे बच्चों के लिवर और किडनी पर बुरा असर पड़ने का डर था।

लेकिन अब WHO ने 'आर्टेमदर-ल्यूमेफेंट्रिन' (artemether-lumefantrine) के उस फॉर्मूले को हरी झंडी दे दी है, जो खास तौर पर छोटे बच्चों के लिए बना है।

  • फायदा: हर साल अफ्रीका और एशिया के करीब 3 करोड़ बच्चों को इससे सही इलाज मिलेगा।
  • असर: अब साइड इफेक्ट्स और टॉक्सिसिटी का खतरा न के बराबर होगा।

2. 'अदृश्य' मलेरिया का भी होगा पर्दाफाश

मलेरिया के कुछ कीटाणु (Parasites) इतने चालाक हो गए हैं कि वे पुराने टेस्ट (HRP2-based RDTs) में पकड़ में ही नहीं आते। हॉर्न ऑफ अफ्रीका जैसे इलाकों में तो 80% केस मिस हो रहे थे, जिससे मरीज को लगता था कि उसे मलेरिया नहीं है और वह बिना इलाज के मर जाता था।

WHO ने अब 3 ऐसे नए रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट (RDTs) पेश किए हैं जो कीटाणु के उस प्रोटीन (pf-LDH) को पकड़ते हैं जिसे वह छुपा नहीं सकता। यानी अब मलेरिया चाहे कितना भी छुप जाए, इन मशीनों से बच नहीं पाएगा।

"मलेरिया ने सदियों से हमारे बच्चों को छीना है और समुदायों की उम्मीदें तोड़ी हैं। लेकिन आज कहानी बदल रही है। नई वैक्सीन और दवाइयां इस लड़ाई का पासा पलट रही हैं।"
— डॉ. टेड्रोस अदनोम घेब्रेयेसस, महानिदेशक, WHO

क्या कहते हैं ताजा आंकड़े?

WHO की 2025 की रिपोर्ट डराने वाली भी है और उम्मीद जगाने वाली भी:

  • मामले: 2024 में करीब 28.2 करोड़ केस मिले और 6.10 लाख मौतें हुईं (जो 2023 के मुकाबले ज्यादा हैं)।
  • कामयाबी: 47 देश अब मलेरिया मुक्त हो चुके हैं।
  • बचाव: साल 2000 से अब तक करीब 1.4 करोड़ लोगों की जान बचाई जा चुकी है।

हमारा संकल्प: इस साल की थीम है- "मलेरिया खत्म करने का जुनून: अब हम कर सकते हैं, अब हमें करना ही होगा।" यह सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि उन लाखों परिवारों के लिए उम्मीद है जो हर साल इस बीमारी की भेंट चढ़ जाते हैं।

SK NISHAD

Founder & Editor-in-Chief Delhi , New Delhi
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My name is SK Nishad, the Founder of Dainik Dhamaka Patrika, a digital news platform dedicated to delivering accurate, reliable, and impactful news to the public. I am committed to responsible journalism and strive to highlight important issues with honesty, transparency, and integrity.
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