चित्रकूट :– उत्तर प्रदेश का चित्रकूट जिला, जो अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है, आज बेलगाम यातायात व्यवस्था और भारी वाहनों (ट्रकों, बसों, डंपरों) की वजह से मौत की सड़कों में तब्दील होता जा रहा है। पिछले एक साल से ज्यादा समय में यहां हुईं सड़क दुर्घटनाओं ने प्रशासन की पोल खोलकर रख दी है। आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2024 और 2025 में केवल भारी वाहनों से जुड़े हादसों में 50 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, जबकि सैकड़ों गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
हादसों की भरमार: आंकड़े जो चौंकाते हैं
जिला यातायात प्रकोष्ठ और पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, जनवरी 2024 से जून 2024 के बीच कुल 108 सड़क दुर्घटनाएं हुईं जिनमें 75 मौतें और 83 लोग घायल हुए। वहीं 2025 की इसी अवधि में दुर्घटनाएं बढ़कर 216 हो गईं, जिनमें 117 मौतें और 212 घायल हुए। यानी महज एक साल में हादसे दोगुने से भी ज्यादा हो गए।
ये आंकड़े सभी प्रकार की सड़क दुर्घटनाओं के हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इनमें भारी वाहनों की हिस्सेदारी 60-70% तक है, क्योंकि अधिकतर टक्करें ट्रक, डंपर या बसों से ही होती हैं।
2024: ट्रकों और डंपरों ने बरपाया कहर
वर्ष 2024 में चित्रकूट जिले में भारी वाहनों से हुईं प्रमुख दुर्घटनाएं:
- 2 अप्रैल 2024 – कर्वी कोतवाली क्षेत्र में तेज रफ्तार डंपर ने ऑटो रिक्शा को टक्कर मारी, 5 लोगों की मौत, 3 गंभीर घायल।
- 13 जुलाई 2024 – झांसी-मिर्जापुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर ट्रक ने बाइक को टक्कर मारी, 2 युवकों की मौत। चालक ट्रक लेकर फरार।
- 10 अक्टूबर 2024 – बिंदीराम होटल के पास खड़े ट्रक में तेज रफ्तार बाइक टकराई, 3 लोगों की मौत। मृतक देवी दर्शन कर लौट रहे थे।
- 6 दिसंबर 2024 – रैपुरा थाना क्षेत्र में ट्रक और बोलेरो की आमने-सामने टक्कर, 6 लोगों की मौत, 5 गंभीर घायल। परिवार प्रयागराज से अस्थि विसर्जन कर लौट रहा था।
- 10 दिसंबर 2024 – मंदाकिनी पुल पर ट्रक ने बाइक को पीछे से टक्कर मारी, 1 महिला की मौत, उसका बेटा और देवर घायल।
2024 में केवल ट्रक/डंपर से जुड़ी इन 5 घटनाओं में कुल 17 मौतें और 20 से अधिक घायल हुए। (नोट: यह आंकड़ा केवल प्रमुख रिपोर्टेड घटनाओं पर आधारित है।)
2025: मौत का सिलसिला जारी, बस और ट्रक दोनों बने जानलेवा
2025 में भी भारी वाहनों का कहर थमा नहीं:
- 5 मार्च 2025 – भरतकूप थाना क्षेत्र में तेज रफ्तार डंपर ने मजदूरों से भरी पिकअप को टक्कर मारी, 4 महिलाओं की मौत, एक दर्जन से अधिक घायल। सभी प्रयागराज महाकुंभ से सफाई कार्य कर लौट रहे थे।
- 26 मई 2025 – ट्रैक्टर-ट्रॉली और ट्रक की आमने-सामने टक्कर, 2 लोगों की मौत, 12 घायल।
- 27 मई 2025 – राजापुर क्षेत्र में तेज रफ्तार ट्रक ने बाइक सवार दो तीर्थ यात्रियों को रौंदा, 2 लोगों की मौत।
- 19 जून 2025 – रैपुरा थाना क्षेत्र के टोल प्लाजा पर तेज रफ्तार ट्रक ने तोड़फोड़ करते हुए टोलकर्मियों को रौंदा, 1 की मौत, 2 घायल। जांच में चालक शराब के नशे में निकला।
- 30 जून 2025 – चित्रकूट से प्रयागराज जा रही रोडवेज बस स्कूटी सवार को बचाने के चक्कर में ट्रक से टकराई, 12 लोग घायल, 4 की हालत गंभीर।
- 20 अगस्त 2025 – झांसी-मिर्जापुर राजमार्ग पर तेज रफ्तार ट्रक ने बाइक को पीछे से टक्कर मारी और 200 मीटर तक घसीटा, 2 युवकों की मौत। ट्रक में आग लग गई, चालक फरार।
- 2 नवंबर 2025 – खोह गांव के पास रोडवेज बस और बोलेरो की आमने-सामने टक्कर में 5 लोगों की मौत (मोहित-14, सुभाष-6, रोहित-24, ओंकार-12 और पिता राजा भैया-32), 3 गंभीर घायल। एक ही परिवार के चिराग बुझ गए।
2025 में ट्रक/बस/डंपर से जुड़ी 7 प्रमुख घटनाओं में कुल 16 मौतें और 50 से अधिक घायल हुए।
कुल मिलाकर: डेढ़ साल में 33 से अधिक मौतें सिर्फ भारी वाहनों से
यदि 2024 और 2025 की उपरोक्त रिपोर्टेड घटनाओं को जोड़ें तो कुल 12 प्रमुख भारी वाहन दुर्घटनाओं में 33 से अधिक मौतें और 70 से अधिक घायल हुए हैं। (वास्तविक आंकड़ा इससे अधिक हो सकता है, क्योंकि सभी छोटी घटनाएं मीडिया में रिपोर्ट नहीं होतीं।)
2026: नए साल में मौत का कहर जारी
नया साल 2026 भी चित्रकूट के लिए कोई राहत लेकर नहीं आया। जनवरी से लेकर आज (8 मई) तक के पांच महीनों में ही भारी वाहनों ने दर्जनों परिवारों का सुख-चैन छीन लिया।
जनवरी 2026: वर्ष की शुरुआत में ही झांसी-मिर्जापुर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-35) पर एक तेज रफ्तार ट्रैक्टर ने बाइक को टक्कर मार दी, जिससे दो युवकों की मौके पर ही मौत हो गई।
फरवरी 2026: फरवरी में बरेठी गांव के पास एक दर्दनाक हादसा हुआ, जब एक तेज रफ्तार ट्रक ने सड़क किनारे खड़ी दो महिलाओं को रौंद दिया। अस्थि विसर्जन के लिए प्रयागराज जा रहे परिवार की कार का टायर पंक्चर होने पर ये महिलाएं सड़क किनारे खड़ी थीं कि ट्रक ने इन्हें कुचल दिया। इस हादसे में 45 वर्षीय रानी प्रजापति और 46 वर्षीय शिवकुमारी की मौत हो गई।
मार्च 2026: 1 मार्च को मानिकपुर के ऊंचाडीह मार्ग पर दो बाइकों की आमने-सामने की टक्कर में दो युवकों की मौत हो गई, जबकि पांच लोग घायल हो गए।
अप्रैल 2026: अप्रैल का महीना विशेष रूप से खतरनाक साबित हुआ।
- 3 अप्रैल: मऊ थाना क्षेत्र में लालता सड़क पर एक ट्रैक्टर ने बाइक को टक्कर मार दी, जिसमें एक युवक की मौत हो गई और दूसरा गंभीर रूप से घायल हो गया।
- 16 अप्रैल: पहाड़ी थाना क्षेत्र में कर्वी-राजापुर मार्ग पर तड़के एक तेज रफ्तार ट्रक ने सड़क किनारे खड़े दूसरे ट्रक में पीछे से जोरदार टक्कर मार दी, जिससे दोनों ट्रकों के चालकों की मौत हो गई।
- 28 अप्रैल: रैपुरा थाना क्षेत्र में मैकी मोड़ के पास एक ट्रक ने बाइक को पीछे से टक्कर मार दी, जिससे बाइक सवार दो युवकों ननकू (30) और शिवपूजन (20) की मौत हो गई। ट्रक चालक मौके से फरार हो गया।
मई 2026: मई का महीना तो मानो "काला मई" साबित हो रहा है। महज आठ दिनों के भीतर ही कई बड़े हादसे सामने आए:
- 5 मई: पहाड़ी थाना क्षेत्र के जमहिल पुल के पास एक ऑटो को बचाने के चक्कर में पिकअप अनियंत्रित होकर खाई में पलट गई, जिसमें 13 लोग घायल हो गए।
- 6 मई: मध्य प्रदेश की सीमा से लगी बगदरा घाटी में एक शादी समारोह से लौट रही बस अनियंत्रित होकर पलट गई, जिसमें 16 बाराती घायल हो गए और तीन की हालत गंभीर बनी हुई है। यह बस रैपुरा थाना क्षेत्र से रीवा बारात लेकर गई थी।
- 8 मई (आज): बुधवार सुबह रैपुरा थाना क्षेत्र के देऊंधा गांव के पास एक भीषण सड़क हादसे में ट्रक और डीजे से लदी पिकअप की आमने-सामने टक्कर में दो युवकों की मौत हो गई और दो गंभीर रूप से घायल हो गए। टक्कर इतनी जोरदार थी कि ट्रक सड़क किनारे पलट गया। इसी दिन एक अन्य हादसे में तेज रफ्तार ट्रक ने एक डीजे वाहन को सामने से टक्कर मार दी, जिसमें भी दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई।
विशेषज्ञों की राय: पांच विभाग, फिर भी बेलगाम सड़कें
अमर उजाला की एक रिपोर्ट के अनुसार, शासन ने सड़क दुर्घटनाओं को रोकने की जिम्मेदारी पांच विभागों (परिवहन, यातायात पुलिस, शिक्षा, लोक निर्माण विभाग और स्वास्थ्य विभाग) को सौंपी है, लेकिन इसके बावजूद सड़क हादसों में कोई कमी नहीं आई है। हर साल लाखों रुपये का बजट जागरूकता रैलियों, नुक्कड़ नाटकों और जनसभाओं के नाम पर खर्च किया जाता है, लेकिन असल समस्या "ओवर स्पीडिंग, मोबाइल फोन का प्रयोग, हेलमेट न पहनना और सबसे अहम – भारी वाहनों की मनमानी" पर लगाम नहीं लग पा रही है।
बेलगाम व्यवस्था का सच
चित्रकूट में अधिकांश हादसे झांसी-मिर्जापुर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-35) और प्रयागराज-चित्रकूट हाईवे पर होते हैं। इन मार्गों पर स्पीड ब्रेकर, साइनेज, लाइटिंग और यातायात पुलिस की तैनाती नाममात्र की है। अधिकांश ट्रक चालक रात्रि में ओवर स्पीड, शराब के नशे और लापरवाही से वाहन चलाते हैं, जिसका खामियाजा आम नागरिकों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ता है।
क्या कहता है प्रशासन?
जिला पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह का कहना है कि "दुर्घटनाओं को रोकने के लिए विशेष चेकिंग अभियान चलाए जाते हैं और लापरवाह वाहन चालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाती है।" लेकिन जमीनी हकीकत इसके ठीक विपरीत है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि पुलिस की कार्रवाई अस्थायी रूप से प्रभावी होती है और फिर स्थिति जस की तस हो जाती है।
चित्रकूट जिले में बेलगाम यातायात व्यवस्था और भारी वाहनों की लगातार बढ़ती दुर्घटनाएं प्रशासन, परिवहन विभाग और यातायात पुलिस की सामूहिक विफलता को दर्शाती हैं। जब तक ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक यह सिलसिला जारी रहेगा और हर साल दर्जनों परिवार अपने सदस्यों को खो देंगे।
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