चित्रकूट : उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले की एक अदालत ने आज एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए वर्ष 2019 में लाठी-डंडों और अवैध तमंचे से जानलेवा हमला करने के दोषी 6 अभियुक्तों को 5-5 वर्ष के कठोर कारावास की सज़ा सुनाई। पुलिस महानिदेशक के ‘ऑपरेशन कनविक्शन’ अभियान के तहत चित्रकूट पुलिस की गुणवत्तापूर्ण विवेचना और प्रभावी पैरवी के बूते यह सफलता हासिल हुई है।
मामला थाना राजापुर क्षेत्र के गरीब का पुरवा मजरा सरधुवा गाँव का है। 27 जुलाई 2019 को दोपहर करीब 1 बजे, वादी राजा सिंह के तीन भाई – कमल, शिवशंकर और विनय – राजापुर से मोटरसाइकिल पर वापस घर लौट रहे थे। रास्ते में पड़ोस के ही राजेन्द्र सिंह, राहुल, गुड्डू, गेंडा, अल्लू, सरवेश और उमेश पहले से लाठी-डंडों से लैस होकर घात लगाए बैठे थे। भाइयों को देखते ही सभी ने एकाएक हमला बोल दिया। आरोपियों ने पहले लाठी-डंडों से पीटा, फिर बाइक को तोड़ डाला। इसके बाद गेंडा ने अपने भाई की डबल बैरल बंदूक, राजेन्द्र ने अपनी लाइसेंसी बंदूक और उमेश ने पिता की लाइसेंसी बंदूक व अवैध तमंचे से फ़ायर झोंक दिया। गोली लगने से शिवशंकर के पैर में गंभीर चोट आई, जबकि तीनों को बेहोशी की हालत में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र राजापुर में भर्ती कराना पड़ा।
वादी राजा पुत्र साधू सिंह ने उसी शाम थाने में लिखित तहरीर दी, जिस पर मुकदमा संख्या 133/2019 धारा 147, 148, 149, 307, 323, 325, 427, 506 भारतीय दंड संहिता के तहत पंजीकृत कर विवेचना अधिकारी उपनिरीक्षक अखिलेश राय ने गहन जाँच की। तत्कालीन थाना प्रभारी निरीक्षक गुलाब त्रिपाठी ने आरोपियों की पहचान और साक्ष्य जुटाकर कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। ‘ऑपरेशन कनविक्शन’ के लिए चिन्हित इस केस में अभियोजन अधिकारियों ने वैज्ञानिक साक्ष्य, मेडिकल रिपोर्ट और चश्मदीद बयानों के दम पर मजबूत पैरवी की।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश चित्रकूट ने दिनांक 1 मई 2026 को एक राय होकर फैसला सुनाया। न्यायालय ने आरोपी 1. राजेन्द्र सिंह उर्फ ननकू सिंह, 2. गुड्डू पुत्र राजेन्द्र सिंह, 3. गेंडा उर्फ नागेन्द्र पुत्र बच्छराज सिंह, 4. अल्लू उर्फ जितेन्द्र पुत्र बच्छराज सिंह, और 5. सर्वेश सिंह पुत्र देवनाथ सिंह को 5-5 वर्ष के कठोर कारावास और कुल 40,000 रुपये अर्थदण्ड की सज़ा दी। छठे आरोपी उमेश सिंह पुत्र चन्द्रभूषण को भी 5 वर्ष कठोर कारावास तथा 10,000 रुपये अर्थदण्ड से दण्डित किया गया। सभी अभियुक्त गरीब का पुरवा मजरा सरधुवा के रहने वाले हैं।
चित्रकूट पुलिस अधीक्षक ने फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “यह सजा इस बात का प्रमाण है कि कानून में देरी नहीं बल्कि न्याय की गारंटी है। ऑपरेशन कनविक्शन के तहत पुलिस की प्रतिबद्धता अपराधियों को सलाखों के पीछे पहुँचाने तक जारी रहेगी।” अभियोजन टीम ने बताया कि डीएनए, फायर आर्म एक्सपर्ट और घटनास्थल से ज़ब्त लाठी-डंडों ने आरोपियों की साजिश को उजागर किया।
इस फैसले ने पूरे इलाके में पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना और पुलिस के प्रति भरोसा बढ़ाया है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि अगर विवेचना में ऐसी पारदर्शिता रहे तो अपराध पर अंकुश ज़रूर लगेगा। गौरतलब है कि पिछले कई वर्षों से चित्रकूट जिले में लंबित मुकदमों में तेजी से सुनवाई और सजा का सिलसिला #OperationConviction के अंतर्गत बना हुआ है।
अंततः न्याय की जीत – चित्रकूट पुलिस ने एक और सशक्त उदाहरण प्रस्तुत किया है, जो अपराधियों के लिए चेतावनी और आम नागरिक के लिए सुरक्षा का भरोसा है।




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