चित्रकूट में अवैध खनन के खिलाफ सख्ती: 1150 वाहन जांचे, 87 पर कार्रवाई, 6 मशीनें पकड़ीं, अब जनता ने पूछे ये 5 सवाल
चित्रकूट में अवैध खनन के खिलाफ सख्ती: 1150 वाहन जांचे, 87 पर कार्रवाई, 6 मशीनें पकड़ीं, अब जनता ने पूछे ये 5 सवाल
चित्रकूट। जिलाधिकारी के निर्देश पर गठित जिला स्तरीय टास्क फोर्स ने अवैध खनन और परिवहन के खिलाफ 23 मई से 8 जून 2026 तक विशेष अभियान चलाकर बड़ी कार्रवाई की। इस दौरान कुल 1,150 वाहनों की सघन जांच की गई, जिसमें 87 वाहन अवैध परिवहन करते पाए गए और उनके खिलाफ उत्तर प्रदेश उपखनिज (परिहार) नियमावली-2021 के तहत कार्रवाई की गई। साथ ही अवैध खनन में लगी 6 मशीनों को भी पकड़ा गया।
अभियान के दौरान 25 वाहन बिना नंबर प्लेट के चलते मिले, जिन पर परिवहन विभाग ने अपने प्रावधानों के तहत कार्रवाई की। प्रशासन के अनुसार, 1 जनवरी 2026 से अब तक अवैध परिवहन में संलिप्त 346 वाहनों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 110.60 लाख रुपये की अर्थदंड राशि निर्धारित मद में जमा कराई जा चुकी है। इतना ही नहीं, 9 वाहनों के खिलाफ संबंधित थानों में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है और 15 वाहनों के खिलाफ न्यायालय में परिवाद दाखिल किए गए हैं।
जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों और टास्क फोर्स को निर्देश दिए हैं कि अवैध खनन, परिवहन और ओवरलोडिंग के खिलाफ यह अभियान निरंतर जारी रखा जाए और दोषियों के खिलाफ कठोर एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
प्रशासन की सख्ती के बीच आम जनता के कुछ स्वाभाविक प्रश्न
प्रशासन के इस कड़े रुख और लगातार हो रही कार्रवाइयों के बीच आम जनता के मन में कुछ स्वाभाविक प्रश्न उठ रहे हैं, जिन पर विचार होना स्वस्थ लोकतंत्र की निशानी है।
अभियान में बड़ी संख्या में वाहन पकड़े जाने और करोड़ों रुपये के जुर्माने के बाद भी क्या जिले में अवैध खनन पर वास्तविक रोक लग पा रही है? आम आदमी यह समझना चाहता है कि कहीं यह चक्र तो नहीं बन गया कि वाहन पकड़े जाएं, जुर्माना लिया जाए और फिर वही वाहन दोबारा अवैध परिवहन में लग जाएं। 1 जनवरी से अब तक 110.60 लाख रुपये की वसूली यह भी बताती है कि जिले में अवैध खनन का पैमाना कितना बड़ा है। जनता जानना चाहती है कि क्या जुर्माने की यह राशि अवैध खनन को हतोत्साहित करने में कारगर साबित हो रही है, या यह केवल सरकारी राजस्व का हिस्सा बनकर रह जाती है?
बिना नंबर प्लेट के पकड़े गए 25 वाहनों को लेकर है। आमतौर पर सड़कों पर पुलिस और परिवहन विभाग की चेकिंग होती रहती है, ऐसे में बिना नंबर प्लेट के ये वाहन इतने दिनों तक सड़कों पर कैसे चलते रहे? इस पर प्रशासनिक स्तर पर समीक्षा की उम्मीद की जा रही है। 9 वाहनों पर एफआईआर और 15 पर परिवाद हुए हैं। आम लोगों की दिलचस्पी इस बात में है कि इन मामलों में केवल वाहन चालक ही आरोपी बनाए गए हैं या मालिकों और संभावित बड़े खनन कारोबारियों तक भी जांच की पहुंच बनी है। प्रशासन की पारदर्शिता इस मामले में जनता का भरोसा और मजबूत कर सकती है।
जिन 6 मशीनों पर कार्रवाई की गई, क्या उन्हें सील या जब्त किया गया है? मशीनों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई के बिना अवैध खनन पर स्थायी लगाम लगाना मुश्किल माना जाता है।
प्रशासन का कहना है कि जिलाधिकारी के निर्देश पर अभियान निरंतर जारी रहेगा और किसी भी स्तर पर कोताही नहीं बरती जाएगी। चित्रकूट की जनता उम्मीद करती है कि यह सख्ती सिर्फ आंकड़ों तक सीमित न रहकर जमीनी हकीकत बनेगी, ताकि जिले के प्राकृतिक संसाधन सुरक्षित रह सकें।
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