कौशांबी : सात दिन का सत्यापन या सिर्फ दिखावा? कौशाम्बी में ऑपरेशन पहचान के बीच थाना संस्कृति पर उठी उँगलियाँ
कौशांबी : सात दिन का सत्यापन या सिर्फ दिखावा? कौशाम्बी में ऑपरेशन पहचान के बीच थाना संस्कृति पर उठी उँगलियाँ
कौशाम्बी। पुलिस मुख्यालय के आदेश पर शनिवार से कौशाम्बी पुलिस ने "ऑपरेशन पहचान" के तहत सात दिन का विशेष अभियान छेड़ दिया। अफसरों का कहना है कि यह अभियान अपराधियों की वर्तमान गतिविधियों की जानकारी जुटाने और उन पर नियंत्रण के लिए है। लेकिन जैसे ही थानेदार से लेकर बीट आरक्षी तक हरकत में आए, आम जनता के मन में वही पुराना सवाल फिर कुलबुलाने लगा—आखिर ये अपराधी अब तक सक्रिय कैसे रहे? जिस अपराधी को आज पहचानने निकली है पुलिस, क्या कल तक उसके साथ कोई और ही "पहचान" नहीं चल रही थी?
पुलिस द्वारा जारी प्रेस नोट के अनुसार, अपर पुलिस महानिदेशक प्रयागराज जोन के निर्देशन, पुलिस महानिरीक्षक प्रयागराज परिक्षेत्र के मार्गदर्शन और पुलिस अधीक्षक कौशाम्बी श्री सत्यनारायण के नेतृत्व में यह अभियान चल रहा है। इसके तहत टॉप-10 अपराधियों, हिस्ट्रीशीटरों, चोरी-लूट-डकैती के अभियुक्तों, गोकशी में शामिल अपराधियों, अवैध शराब एवं मादक पदार्थ तस्करों, गैंगस्टर और अन्य सक्रिय अपराधियों के घरों पर जाकर यूपी कॉप ऐप के डेटा से उनका भौतिक सत्यापन किया जा रहा है।
अब तक मिली जानकारी के मुताबिक, टॉप-10 अपराधियों का सत्यापन स्वयं क्षेत्राधिकारियों द्वारा भारी पुलिस बल के साथ किया जा रहा है। लेकिन यहीं से सवालों की झड़ी शुरू होती है। क्या ये टॉप-10 अपराधी और हिस्ट्रीशीटर अभी तक पुलिस की नज़रों से ओझल थे? अगर नहीं, तो इनके खिलाफ अब तक प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई? किसी अपराधी की वर्षों से चल रही सक्रियता क्या स्थानीय थाना स्तर पर होने वाली किसी "नियमित सेटिंग" की ओर इशारा नहीं करती? प्रेस नोट में यह भी स्पष्ट नहीं किया गया कि यदि सत्यापन के दौरान कोई अपराधी बिना किसी पूर्व कार्रवाई के खुलेआम पाया जाता है, तो संबंधित थाना प्रभारी या बीट आरक्षी की जवाबदेही क्या होगी?
अभियान का निकट पर्यवेक्षण क्षेत्राधिकारियों द्वारा किया जा रहा है। पुलिस विभाग का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य अपराधियों की अद्यतन स्थिति जानना और अपराध नियंत्रण को सुदृढ़ करना है। लेकिन सड़क से लेकर चौपाल तक यही चर्चा है कि अगर एक हफ्ते में सारे सत्यापन हो जाएँगे, तो क्या इसके बाद इन अपराधियों पर कार्रवाई की कोई समय-सीमा भी तय होगी? या यह सिर्फ एक फाइली कवायद बनकर रह जाएगी? कौशाम्बी की जनता की निगाहें अब इस सात दिवसीय अभियान के नतीजों पर टिकी हैं। असली जीत तब मानी जाएगी, जब इस "पहचान" के बाद गिरफ्तारियों का आँकड़ा भी सामने आएगा, वरना यह महज़ एक और सरकारी नाटक ही कहलाएगा।
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