कुशीनगर : सात साल बाद पुलिस की साँसत रंग लाई! हत्या के प्रयास के दो दोषियों को 10-10 साल की सजा, ऑपरेशन कन्विक्शन का कमाल
कुशीनगर : सात साल बाद पुलिस की साँसत रंग लाई! हत्या के प्रयास के दो दोषियों को 10-10 साल की सजा, ऑपरेशन कन्विक्शन का कमाल
कुशीनगर। एक तरफ जहाँ सालों पुराने मुकदमों की फाइलें धूल खा रही हैं, वहीं कुशीनगर पुलिस ने सात साल पहले हुए एक जानलेवा हमले के दो दोषियों को सश्रम कारावास दिलाकर बता दिया कि इंसाफ भले ही देर से मिले, मगर टस से मस नहीं होता। थाना तुर्कपट्टी के मथुरिया गाँव के दो अभियुक्तों को जिला एवं सत्र न्यायालय ने 10-10 वर्ष की सख्त सजा सुनाई है।
दरअसल,
यह पूरा मामला 2017 में थाना तुर्कपट्टी पर दर्ज मुकदमा संख्या 294/2017,
धारा 307 भारतीय दंड विधान (हत्या का प्रयास) से जुड़ा है। स्थानीय पुलिस,
मॉनिटरिंग सेल और अपर जिला शासकीय अधिवक्ता की टीम ने न्यायालय में प्रभावी
पैरवी करते हुए एक के बाद एक ठोस साक्ष्य रखे, जिनके आगे दोषियों की कोई
दलील टिक न सकी। अदालत ने दोनों अभियुक्तों—सतीश पुत्र जोगेन्द्र प्रसाद
गोंड़ और टुनटुन गोंड़ पुत्र मोतीचन्द गोंड़—को आरोप सिद्ध पाकर 10-10 वर्ष
के कठोर कारावास और ₹10,000-₹10,000 के अर्थदण्ड से दंडित किया।
कुशीनगर
पुलिस के अनुसार यह कार्रवाई 'ऑपरेशन कन्विक्शन' के तहत की गई। इस अभियान
का मकसद ही है कि गंभीर अपराधों के मामलों में कोर्ट में मज़बूत पैरवी कर
दोषियों को जल्द से जल्द सजा दिलाई जाए। तुर्कपट्टी पुलिस ने मॉनिटरिंग सेल
के साथ तालमेल बिठाकर गवाहों को सुरक्षित रखा और तकनीकी साक्ष्यों का
ताना-बाना ऐसा बुना कि अभियुक्तों का बच निकलना नामुमकिन हो गया।
मथुरिया
गाँव के लोग आज भी उस हमले को याद कर सिहर जाते हैं, जिसमें पीड़ित मौत के
मुँह तक जा पहुँचा था। सजा सुनाए जाने के बाद गाँव में चर्चा है कि इंसाफ
भले सात साल बाद मिला, लेकिन मिला तो पूरा। स्थानीय बुज़ुर्गों का कहना है
कि ऐसी सज़ाओं से समाज में कानून का डर कायम रहता है और अपराधी यह समझ जाते
हैं कि वर्दी की पकड़ से वक्त की मोहलत कोई मायने नहीं रखती।
पुलिस अधीक्षक कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत आने वाले दिनों में और भी पुराने मामलों पर तेज़ी से काम किया जाएगा ताकि अपराध और सजा के बीच की खाई को पाटा जा सके।
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