चित्रकूट, उत्तर प्रदेश: धार्मिक आस्था के केंद्र कहे जाने वाले चित्रकूट की गलियों में आजकल “राम-राम” से ज़्यादा “हमारा पैसा कहाँ है?” की पुकार गूंज रही है। 2026 के पहले ही चार महीनों में जिले से भ्रष्टाचार के इतने मामले सामने आए हैं कि सरकारी महकमों की छवि एक संगठित लूट-तंत्र से कम नहीं लगती। हम हर उस गरीब के साथ हुई “फाइलों में हुई डकैती” की बात कर रहे हैं, जिसके हिस्से की रोटी भी सरकारी दलालों और अफसरों ने झपट ली।
कोषागार में सेंध: 43.13 करोड़ की पेंशन, मुर्दों के खातों में भी लूट!
यह चित्रकूट का अब तक का सबसे बड़ा और हैरान कर देने वाला मामला है। जांच में खुलासा हुआ है कि एक बड़े गिरोह ने वर्षों तक कोषागार को अपने “निजी ATM” की तरह इस्तेमाल किया। खेल यह था कि 93 पेंशनभोगियों के नाम पर फर्जी बिल और वाउचर बनाकर 43.13 करोड़ रुपये सीधे खातों में भेज दिए गए। यह साजिश 2018 से शुरू होकर सितंबर 2025 तक लगातार चलती रही।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि दस संदिग्ध पेंशनरों में एक वह भी था जिसकी मौत हो चुकी थी, फिर भी उसके खाते में करोड़ों रुपये की पेंशन और एरियर ठूंसे जाते रहे। इसके बाद बिचौलिए 10 से 20 प्रतिशत का मोटा कमीशन लेकर बाकी रकम निकाल लेते थे।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) अब पूरी ताकत से जांच में जुट गया है। ED ने अप्रैल 2026 में कोषागार के हर पूर्व और वर्तमान कर्मचारी-अधिकारी का ब्यौरा मांग लिया है। SIT ने 99 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है, जिनमें से 35 आरोपी सलाखों के पीछे हैं। अप्रैल में ही SIT ने दलाली के इस खेल के दो सगे भाइयों — हिमांशु और प्रियांशु सिंह — को गिरफ्तार किया, जिनके पिता ओमप्रकाश सिंह भी इसी मामले में जेल में हैं। साफ है, यहां पूरा खानदान ही “पेंशन ठगी” का धंधा कर रहा था। लेकिन सवाल यह है कि इतनी बड़ी रकम ऊपरी स्तर की मिलीभगत के बिना कैसे निकली? यह ED को अभी खोदना बाकी है।
पंचायतों के कोष से 17.85 करोड़ का सफाया, अफसरों की चुप्पी
अप्रैल 2026 में ही पंचायती राज विभाग के उप निदेशक परवेज आलम खां ने SP को तहरीर देकर ऐसा खुलासा किया जिसने पूरे विभाग को हिलाकर रख दिया। उन्होंने बताया कि स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत साल 2023 में मॉडल ग्राम पंचायतों को दिए गए 28.52 करोड़ रुपये में से मात्र 10.67 करोड़ का ही बिल-वाउचर मिला। शेष 17.85 करोड़ रुपये का न कोई हिसाब है और न कोई दस्तावेज़। यह रकम हवा में उड़ गई।
इतना ही नहीं, जिला पंचायत राज अधिकारी (DPRO) कार्यालय ने तो हद ही कर दी। आरोप है कि उप निदेशक की I.D. और पासवर्ड का दुरुपयोग कर बिना अनुमति CSC और PLC निर्माण के नाम पर 26 लाख रुपये ग्राम पंचायतों के खातों में डलवा दिए गए। जब जवाब मांगा गया तो DPRO कार्यालय ने चुप्पी साध ली। मंडलायुक्त के आदेश भी यहां धूल फांक रहे हैं।
PM आवास योजना में फंसा बेबसों का सपना
शहरी इलाकों में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लगभग 14,000 परिवारों ने पक्के घर के सपने देखे थे। लेकिन मार्च 2026 तक सिर्फ 6,678 आवेदनों की ही जांच हो पाई। बाकी 7,157 आवेदन फाइलों में दबे पड़े हैं। सरकारी कर्मचारियों द्वारा “सर्वे-सत्यापन” के नाम पर की जा रही हीलाहवाली और अवैध वसूली का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि हजारों पात्र लोगों तक आवेदन की प्रक्रिया ही नहीं पहुंची। अब तक मात्र 1,646 लोगों को पहली किस्त जारी हो पाई है। शेष पात्र परिवार बदहवास चक्कर काट रहे हैं। "बिना पर्ची, बिना कमीशन, घर नहीं" — यह इलाके का अनकहा नियम बन गया है।
? इसे भी पढ़ें: चित्रकूट: संतों की नगरी की दास्तान-ए-ग़म – जातिवाद, छुआछूत और शोषण की वो तस्वीरें, जिनसे आँखें चुराता है पर्यटन
यह सिर्फ आंकड़े नहीं, एक बदतर हकीकत है
चित्रकूट के ये मामले कोई इकलौती गलती नहीं, बल्कि एक ऐसे सियासी-प्रशासनिक तंत्र का सबूत हैं, जो हमारे करों की रकम पर डाका डाल रहा है। 43 करोड़ की पेंशन लूट से लेकर 14 हजार बेघरों के सपनों तक, हर मामला आम आदमी के विश्वासघात की कहानी है। जब तक दोषियों को सिर्फ निलंबन नहीं, बल्कि कड़ी सज़ा और सम्पत्ति की जब्ती जैसी कार्रवाई नहीं होती, यह सिलसिला थमने वाला नहीं।
— यदि आप भी इस भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाना चाहते हैं, तो इस खबर को शेयर करें, अपने विधायक और जिलाधिकारी को टैग करें। क्योंकि चित्रकूट को अब दलालों और घोटालेबाजों से मुक्ति चाहिए।




टिप्पणियाँ (0)
कोई टिप्पणी नहीं। सबसे पहले टिप्पणी करें!
एक टिप्पणी लिखें
आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा। आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *