चित्रकूट की पवित्र धरा पर एक दर्दनाक सच यह भी है कि राजापुर क्षेत्र के अनगिनत गाँव आज अवैध खनन और प्रशासनिक उदासीनता के काले कारोबार की भेंट चढ़ रहे हैं। आए दिन यहाँ से बालू माफियाओं द्वारा खुलेआम अवैध खनन की घटनाएँ सामने आती हैं, लेकिन जिला प्रशासन और खनिज विभाग की आँखों में धूल झोंकर ये माफिया दिन-रात अपना धंधा चला रहे हैं। प्रतिदिन करोड़ों रुपये के राजस्व की लूट हो रही है, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुँच रहा है।
?️ बेखौफ माफिया, बेबस ग्रामीण
राजापुर तहसील क्षेत्र की गुरगौला और आसपास की खदानों में अवैध खनन के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं। खनन माफिया बिना किसी डर के, नियत सीमा से बाहर निकलकर और सरकारी मानकों के विपरीत भारी-भरकम मशीनों का इस्तेमाल कर यमुना किनारे रेत का दोहन कर रहा है। स्थानीय लोगों की शिकायत है कि जब वे इसकी शिकायत लेकर किसी अधिकारी के पास जाते हैं तो उन्हें टरका-टरका कर वापस लौटा दिया जाता है। क्षेत्र के तमाम जनप्रतिनिधि चुप हैं या फिर इन माफियाओं की मदद कर रहे हैं。
"हम गरीबों की आवाज कौन सुने? पुलिस और प्रशासन के अधिकारी तो खनन माफियाओं के साथ मिलकर हमें ही डराते हैं।" — स्थानीय ग्रामीण की व्यथा।
? प्रशासन की भूमिका पर बड़ा सवाल!
जब हम यह कहते हैं कि प्रशासन विफल रहा है, तो यह कोई बढ़ा-चढ़ाकर कही गई बात नहीं है। साक्ष्य इसके गवाह हैं। हाल के दिनों में, सदर एसडीएम अजय यादव के नेतृत्व में 6 ओवरलोड ट्रकों को जब्त किया गया और कार्रवाई भी हुई。लेकिन, क्षेत्र में यह कार्रवाई उतनी सख्त नहीं है जितनी होनी चाहिए। कहीं न कहीं बात अटक जाती है। कभी कानूनी पेंच, तो कभी वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से मिलने वाला संरक्षण। पूरे जिले में अवैध खनन और परिवहन के खिलाफ प्रशासन ने कार्रवाई के दावे किए हैं, लेकिन राजापुर की धरती पर ये महज कागजों तक ही सीमित रह जाते हैं।
?️ सड़कें नहीं, मुसीबत हैं: मौत का दूसरा नाम
यहाँ की सड़कें जनता के लिए मुसीबत से कम नहीं हैं। अवैध खनन के चलते ओवरलोड ट्रक हर रोज गाँव की कच्ची सड़कों को तबाह कर रहे हैं। कभी बारिश का पानी इन सड़कों को बहा ले जाता है, तो कभी ये तोड़े-फोड़े जाते हैं। इसका नुकसान यह होता है कि बारिश में ग्रामीणों का अपने ही तीर धुमाई गंगू, कलवालिया जैसे गाँव से आना-जाना लगभग असंभव हो जाता है। न ही एंबुलेंस पहुँच पाती है और न ही बीमारों को अस्पताल पहुँचाया जा सकता है। गाँव तो मानो मौत के हवाले कर दिए गए हैं。
? बीमारी की टीस और मौत की पीड़ा
हाल ही में मानिकपुर क्षेत्र से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया, जहाँ गाँव तक सड़क न होने के कारण एंबुलेंस नहीं पहुँच पाई और एक मरीज की जान चली गई। राजापुर क्षेत्र के गाँवों में स्वास्थ्य सुविधाओं का जायजा लें, तो सरकारी अस्पतालों और प्रशासन की बेरुखी से लोगों को मौत के मुंह में जाना पड़ता है। सड़क न होने के कारण बीमार व्यक्ति अपने परिवार वालों के कंधों पर अस्पताल पहुँचता है और रास्ते में ही दम तोड़ देता है। पूरा प्रशासन तंत्र दर्द की इस चीख को अनसुना करता नज़र आता है。
? पानी के लिए तरसती ज़िंदगियाँ
राजापुर क्षेत्र के गाँव, चाहे वो डोड़ा माफी हो या सिद्धपुर, हर जगह पेयजल संकट ने लोगों का जीना हराम कर रखा है。सोलर हैंडपंप वर्षों से खराब पड़े हैं और गाँव के लोग पीने के पानी के लिए मीलों दूर भटकने को मजबूर हैं। सरकारी योजनाएँ सिर्फ कागजों तक सीमित हैं, जबकि धरातल पर हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। लगातार शिकायत करने के बावजूद, बीडीओ समेत तमाम अधिकारी पानी की इस समस्या को सुनने से इनकार कर रहे हैं। यहाँ तक की पानी की समस्या लेकर पहुँचे ग्रामीणों को पुलिस ने ही खदेड़ दिया。
? भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी विकास की राह
राजापुर क्षेत्र में किए गए विकास कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल बहुत बड़ा है। चित्रकूट में कर्वी ब्लॉक के धतुरहन पुरवा में महज एक महीने पहले करोड़ों रुपये से बनी सड़क पहली बारिश में ही बह गई। सड़क के बीचों-बीच 10 मीटर गहरा नाला बन गया है और 5 से अधिक गाँव मुख्यालय से कट गए हैं। ऐसा ही हाल रामनगर ब्लॉक की आरसीसी सड़क का भी है, जहाँ घटिया सामग्री के इस्तेमाल से सड़ें बनी हैं, जो कुछ ही दिनों में टूट कर बिखर गईं।
वही हाल सड़कों की और अवैध खनन से जुड़े मामलों का है। जब ग्रामीण शिकायत लेकर बीडीओ कार्यालय पहुँचते हैं तो उनकी बातें सुनने वाला कोई नहीं होता।
? ये सवाल हर उस अधिकारी से है, जो इन हालात के लिए जिम्मेदार है:
"जब गाँवों तक पक्की सड़क नहीं है, बीमारों को एंबुलेंस नहीं मिलती और पानी के लिए लोग मर रहे हैं, तो सरकारी योजनाओं पर होने वाला करोड़ों का खर्च कहाँ जाता है?"
जब तक प्रशासन जागरूक नहीं होगा और इन मामलों में सख्त कार्रवाई नहीं की जाएगी, तब तक राजापुर क्षेत्र की यह व्यथा जारी रहेगी। यह केवल एक क्षेत्र की समस्या नहीं है। यह हमारी शासन व्यवस्था के चरम भ्रष्टाचार, लापरवाही और संवेदनहीनता की कहानी है।
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