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भीषण गर्मी में तरया सुजान उपकेंद्र से लगातार अघोषित कटौती, लोग बोले- पंखे-कूलर बंद,

भीषण गर्मी में तरया सुजान उपकेंद्र से लगातार अघोषित कटौती, लोग बोले- पंखे-कूलर बंद,

भीषण गर्मी में तरया सुजान उपकेंद्र से लगातार अघोषित कटौती, लोग बोले- पंखे-कूलर बंद,

कुशीनगर। बाहर सड़कें तवे की तरह तप रही हैं और घरों के अंदर पंखे बेजान पड़े हैं। विद्युत वितरण खंड सेवरही के तरया सुजान उपकेंद्र से जुड़े करीब दो दर्जन गाँवों के लोग इस वक्त जिस त्रासदी से गुज़र रहे हैं, उसे सुनकर गुस्सा और तरस, दोनों आते हैं। मुख्यमंत्री के निर्बाध बिजली आपूर्ति के आदेश और ऊर्जा मंत्री के पीक हावर में भी सप्लाई जारी रहने के दावों के बीच, हकीकत यह है कि यहाँ बिजली का आना-जाना किसी जुए की तरह हो चुका है—पता नहीं कब आए और कब चली जाए।

स्थानीय लोग बताते हैं कि सुबह से रात तक कभी भी बिजली गुल हो जाती है। कोई पूर्व सूचना नहीं, कोई तय समय नहीं। किसी को खेत से लौटना होता है तो उसे नहीं मालूम कि घर लौटने पर पंखा चलेगा भी या नहीं। किसी माँ को बच्चे की दवा रखनी होती है, पर फ्रिज तक बंद पड़ा है।

और हाँ, जब लोग परेशान होकर फोन मिलाते हैं तो उधर से घंटी बजती रहती है, कोई उठाता नहीं। आरोप है कि  अभियंता जे ई बिकास साहनी और उपकेंद्र परिचालक, दोनों ही उपभोक्ताओं की कॉल को नज़रअंदाज़ कर रहे हैं। भीषण गर्मी में बूढ़े-बच्चों का हाल बेहाल है। लोग सवाल कर रहे हैं कि आखिर यह सब किसके इशारे पर हो रहा है?

ग्रामीणों का कहना है कि कभी अधिकारी ओवरहीटिंग का नाम लेकर शटडाउन कर देते हैं, तो कभी रोस्टिंग के नाम पर घंटों बिजली गायब रखते हैं। लेकिन सवाल यह है कि जब गर्मी अपने चरम पर है और माँग ज़्यादा है, तब रोस्टिंग क्यों? क्या विभाग के पास इसका कोई तय मानक है? और अगर मशीन ही बार-बार गर्म हो रही है तो उसे ठीक क्यों नहीं किया जा रहा? जवाब किसी के पास नहीं है। जब मामला अधिशासी अभियंता सेवरही तक पहुँचा तो उन्होंने जाँच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा दिलाया। उनका कहना था कि जो भी जिम्मेदार होगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा। लेकिन जिस रफ्तार से लोगों की मुश्किलें बढ़ रही हैं, उस हिसाब से देर हो चुकी है। उपभोक्ता पूछ रहे हैं कि क्या जाँच के नाम पर यह मामला भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर कटौती करनी ही है तो कम से कम एक नियमित समय सारिणी जारी की जाए, ताकि लोग अपने कामकाज उसी हिसाब से निपटा सकें। साथ ही, एक ऐसी हेल्पलाइन चालू की जाए जहाँ फोन करने पर कोई जवाब तो दे। फिलहाल, स्थिति यह है कि न बिजली है, न जवाब, न राहत। और अगर जल्द ही हालात नहीं सुधरे तो गाँव वाले सड़क पर उतरने की तैयारी कर चुके हैं।

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Shatrumardan Pravin Mani Tripathi
Reporter

Kushinagar, Uttar Pradesh

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