भारत में थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई दर फरवरी 2026 में बढ़कर 2.13 प्रतिशत हो गई है। इससे पहले जनवरी महीने में यह दर 1.81 प्रतिशत दर्ज की गई थी। सरकार द्वारा सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, थोक महंगाई में यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से खाद्य पदार्थों की कीमतों में वृद्धि के कारण हुई है।
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, अर्थशास्त्रियों ने फरवरी में थोक महंगाई दर लगभग 2 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था, लेकिन वास्तविक आंकड़ा इससे थोड़ा अधिक रहा।
खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी
फरवरी में खाद्य वस्तुओं की थोक कीमतें सालाना आधार पर 1.85 प्रतिशत बढ़ीं, जबकि जनवरी में यह बढ़ोतरी 1.41 प्रतिशत थी। खाद्य कीमतों में वृद्धि का सीधा असर थोक महंगाई पर पड़ा है।
सब्जियों की कीमतों में तेजी
आंकड़ों के अनुसार फरवरी में सब्जियों की कीमतों में 4.73 प्रतिशत की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि जनवरी में सब्जियों की कीमतें 6.78 प्रतिशत तक बढ़ी थीं, यानी फरवरी में वृद्धि की रफ्तार कुछ कम रही।
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में भी बढ़ोतरी
निर्मित उत्पादों (Manufactured Products) की कीमतों में भी वृद्धि देखी गई। फरवरी में इनकी कीमतें 2.92 प्रतिशत बढ़ीं, जबकि जनवरी में यह बढ़ोतरी 2.86 प्रतिशत थी।
ईंधन और बिजली की कीमतों में गिरावट
इसके विपरीत ईंधन और बिजली (Fuel & Power) की कीमतों में गिरावट जारी रही। फरवरी में इनकी कीमतें 3.78 प्रतिशत घट गईं, जबकि जनवरी में इनमें 4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी।
क्या है इसका असर
विशेषज्ञों के अनुसार, खाद्य वस्तुओं और निर्माण क्षेत्र में कीमतों में बढ़ोतरी का असर आने वाले महीनों में खुदरा महंगाई (CPI) पर भी पड़ सकता है। हालांकि ईंधन और ऊर्जा की कीमतों में गिरावट से महंगाई के दबाव को कुछ हद तक संतुलित करने में मदद मिल सकती है।




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