कुशीनगर : सेवरही बिजली विभाग में करोड़ों के घोटाले की आँच ऊर्जा मंत्री तक पहुँची, कागजों पर लग गए ट्रांसफार्मर, जमीन पर नदारद अधिशासी अभियंता पर गंभीर आरोप
कुशीनगर : सेवरही बिजली विभाग में करोड़ों के घोटाले की आँच ऊर्जा मंत्री तक पहुँची, कागजों पर लग गए ट्रांसफार्मर, जमीन पर नदारद अधिशासी अभियंता पर गंभीर आरोप
कुशीनगर। उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन के विद्युत वितरण खंड सेवरही में भ्रष्टाचार की एक ऐसी कहानी सामने आई है जिसने पूरे महकमे की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि बिना ट्रांसफार्मर लगाए ही करोड़ों रुपये का भुगतान कर दिया गया, OTS योजना को अवैध वसूली का जरिया बना लिया गया और सरकारी खजाने को चूना लगाया गया। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह सब अधिशासी अभियंता अरुण कुमार यादव की देखरेख में होता रहा और अब यह मामला सीधे ऊर्जा मंत्री के दरबार तक जा पहुँचा है।
बिजनेस प्लान 2023-24: कागजों पर दौड़ी बिजली, जमीन पर नहीं लगा एक भी खंभा
प्राप्त
जानकारी के अनुसार, बिजनेस प्लान 2023-24 के तहत सेवरही क्षेत्र में 20
करोड़ और 70 करोड़ की दो बड़ी योजनाओं के अंतर्गत कुल 248 कार्य स्वीकृत
हुए थे। इनमें ट्रांसफार्मरों की क्षमता वृद्धि और नए ट्रांसफार्मर लगाने
का काम शामिल था। गोंडा की कंपनी SMM इंफ्रा टेक प्राइवेट लिमिटेड को करीब 1
करोड़ रुपये का टेंडर दिया गया। लेकिन जब जमीनी स्तर पर पड़ताल की गई तो
पाया गया कि कई स्थानों पर ट्रांसफार्मर का एक नट-बोल्ट तक नहीं लगा था।
इसके बावजूद अधिशासी अभियंता अरुण यादव के स्तर से ठेकेदार को पूरी रकम का
भुगतान जारी कर दिया गया। सवाल उठता है कि आखिर बिना काम कराए यह भुगतान
किस आधार पर किया गया? और अगर काम नहीं हुआ तो फिर वह पैसा गया कहाँ?
OTS योजना में 'खेल': जनता भी लुटी, सरकार को भी लगा चूना
सरकार
ने गरीब उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए OTS योजना चलाई थी, ताकि उनका
बकाया माफ हो सके और वे आसानी से बिल जमा कर सकें। लेकिन आरोप है कि सेवरही
विद्युत खंड में इस योजना को 'अवैध वसूली का मेगा सेल' बना दिया गया।
उपभोक्ताओं से बैकडोर से मोटी रकम ऐंठी गई और सरचार्ज माफी के बाद जो मूलधन
सरकारी खजाने में जाना चाहिए था, उसे फाइलों की बाजीगरी से सरचार्ज में
डाल दिया गया। नतीजा यह हुआ कि न तो सरकार का राजस्व बढ़ा और न ही
उपभोक्ताओं को सही मायने में राहत मिली। यह सवाल जनता की जुबान पर है कि
आखिर इस खेल में अधिशासी अभियंता की भूमिका क्या थी और विभाग के आला अफसर
क्यों चुप रहे?
बिजनेस प्लान 2024-25 में भी 'हवाई विकास' का आरोप
यही
नहीं, आरोप यह भी हैं कि बिजनेस प्लान 2024-25 के तहत होने वाले कार्यों
को भी बिना कराए ही डकार लिया गया। काम सिर्फ कागजों पर हुआ और सरकारी बजट
सीधे अधिकारियों और ठेकेदारों की जेबों में स्थानांतरित होता रहा। अगर यह
सच है तो यह प्रदेश सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति का खुला मजाक है।
प्रशासन और जनता के सवाल
अब
जब यह मामला ऊर्जा मंत्री तक पहुँच गया है तो आम जनता यह जानना चाहती है
कि बिना ट्रांसफार्मर लगे करोड़ों का भुगतान करने वाले अधिशासी अभियंता
अरुण कुमार यादव अब तक निलंबित क्यों नहीं हुए? जनता के पैसे को बंदरबांट
करने वाली कंपनी के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी और कब होगी? विजिलेंस और STF
की जाँच कब बैठेगी? क्या विभाग सिर्फ कागजी कार्रवाई करके मामले को ठंडे
बस्ते में डालने की कोशिश करेगा?
स्थानीय लोगों में इस मामले को लेकर भारी आक्रोश है। उपभोक्ताओं का कहना है कि जिस विभाग को उनकी समस्याओं का समाधान करना चाहिए, वहीं के अधिकारी उनकी जेब पर डाका डाल रहे हैं। अब सबकी निगाहें ऊर्जा मंत्री और शासन की ओर हैं कि इस महाघोटाले में दोषियों के खिलाफ कब तक ठोस कार्रवाई होती है। अगर समय रहते लगाम नहीं लगी तो यह सिर्फ सेवरही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश की बिजली व्यवस्था को खोखला कर देगा।
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