स्वामी प्रसाद मौर्य पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के विरोध में थाने पहुंचे सैकड़ों समर्थक, एफआईआर दर्ज करने की उठाई मांग
स्वामी प्रसाद मौर्य पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के विरोध में थाने पहुंचे सैकड़ों समर्थक, एफआईआर दर्ज करने की उठाई मांग
रिपोर्टर: इमरानुद्दीन (Tiger King)
कुशीनगर जनपद के तमकुहीराज में शनिवार को अपनी जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य के विरुद्ध सोशल मीडिया पर कथित अमर्यादित एवं आपत्तिजनक टिप्पणी किए जाने के विरोध में सैकड़ों की संख्या में पार्टी कार्यकर्ता और समर्थक एकजुट होकर स्थानीय थाने पहुंचे। समर्थकों ने संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध तहरीर सौंपते हुए तत्काल एफआईआर दर्ज कर कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की।
थाने पहुंचे कार्यकर्ताओं ने कहा कि भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को अपनी बात रखने, किसी भी राजनीतिक दल, नेता या उसकी विचारधारा की आलोचना करने का अधिकार देता है। किंतु किसी भी जननेता के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाली अभद्र, अशोभनीय एवं व्यक्तिगत टिप्पणियां अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सीमा से बाहर हैं और समाज में वैमनस्य फैलाने का कार्य करती हैं। ऐसे मामलों में कानून के अनुसार कार्रवाई होना आवश्यक है।
समर्थकों का कहना था कि स्वामी प्रसाद मौर्य लंबे समय से सामाजिक न्याय, समानता और वंचित वर्गों के अधिकारों की आवाज उठाते रहे हैं। ऐसे में उनके विरुद्ध की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी न केवल उनके समर्थकों की भावनाओं को आहत करती है, बल्कि सामाजिक सौहार्द को भी प्रभावित कर सकती है।
समर्थकों ने प्रशासन से मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच कर संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध विधि सम्मत धाराओं में तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए और दोषी पाए जाने पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि कानून सभी के लिए समान है और किसी भी व्यक्ति को सोशल मीडिया या अन्य किसी माध्यम से अपमानजनक भाषा का प्रयोग करने की छूट नहीं दी जा सकती।
इस दौरान अपनी जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष रामेश्वर प्रसाद कुशवाहा ने कहा कि पार्टी लोकतांत्रिक मूल्यों और संविधान में पूर्ण विश्वास रखती है। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन समय रहते उचित कार्रवाई नहीं करता है, तो पार्टी लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक दायरे में रहकर व्यापक जनआंदोलन करने के लिए बाध्य होगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
कार्यकर्ताओं ने यह भी दोहराया कि उनका विरोध पूरी तरह शांतिपूर्ण और कानून के दायरे में है। उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष कार्रवाई की अपेक्षा जताते हुए कहा कि किसी भी जनप्रतिनिधि या नागरिक के सम्मान के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होना लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती के लिए आवश्यक है।
> नोट: यह समाचार संबंधित पक्षों द्वारा लगाए गए आरोपों और दिए गए ज्ञापन पर आधारित है। आरोपों की पुष्टि या दोष तय होना जांच एवं कानूनी प्रक्रिया के अधीन है।
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