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*BHU के जेरियाट्रिक विभाग पर गंभीर सवाल! नौ दिनों तक भर्ती बुजुर्ग महिला को नहीं मिला विशेषज्ञ उपचार, डॉ. अनूप सिंह की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल*

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*BHU के जेरियाट्रिक विभाग पर गंभीर सवाल! नौ दिनों तक भर्ती बुजुर्ग महिला को नहीं मिला विशेषज्ञ उपचार, डॉ. अनूप सिंह की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल*

*BHU के जेरियाट्रिक विभाग पर गंभीर सवाल! नौ दिनों तक भर्ती बुजुर्ग महिला को नहीं मिला विशेषज्ञ उपचार, डॉ. अनूप सिंह की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल*

*BHU के जेरियाट्रिक विभाग पर गंभीर सवाल! नौ दिनों तक भर्ती बुजुर्ग महिला को नहीं मिला विशेषज्ञ उपचार, डॉ. अनूप सिंह की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल*


**प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) से शिकायत कर निष्पक्ष जांच, CCTV फुटेज की पड़ताल और जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग।**


**वाराणसी।** काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के जेरियाट्रिक विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। एक बुजुर्ग महिला मरीज के परिजनों ने विभाग में गंभीर चिकित्सकीय लापरवाही, वरिष्ठ चिकित्सकों की अनुपस्थिति, मरीजों की देखरेख में उदासीनता और प्रशासनिक अनुशासनहीनता के आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) सहित संबंधित अधिकारियों से शिकायत की है।


शिकायतकर्ता के अनुसार, उनकी 65 वर्षीय मां को दिनांक 09 अक्टूबर 2026 की रात लगभग 8 से 9 बजे BHU के जेरियाट्रिक विभाग में भर्ती कराया गया था। मरीज को यूरिन डिस्चार्ज नहीं होने की गंभीर समस्या थी। आरोप है कि 09 अक्टूबर से 17 अक्टूबर तक अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान विभागाध्यक्ष/संबंधित वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अनूप सिंह ने एक बार भी वार्ड में आकर मरीज का निरीक्षण नहीं किया।


परिजनों का आरोप है कि नौ दिनों तक वे लगातार डॉ. अनूप सिंह से मुलाकात कराने की मांग करते रहे, लेकिन डॉक्टर पंकज और अन्य कर्मचारियों से अनुरोध करने के बावजूद उनकी मुलाकात नहीं कराई गई। इतना ही नहीं, मरीज की किडनी संबंधी समस्या को देखते हुए नेफ्रोलॉजी विभाग में परामर्श के लिए रेफरल लेटर मांगा गया, लेकिन वह भी उपलब्ध नहीं कराया गया।


### नौ दिनों तक नेफ्रोलॉजी विशेषज्ञ से परामर्श क्यों नहीं?


शिकायत में सबसे गंभीर सवाल यह उठाया गया है कि जब डिस्चार्ज पेपर में किडनी संबंधी समस्या का उल्लेख किया गया, तो आखिर नौ दिनों तक नेफ्रोलॉजी विभाग के विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श क्यों नहीं लिया गया? मरीज को संबंधित विशेषज्ञ विभाग में रेफर क्यों नहीं किया गया?


इसके अतिरिक्त डिस्चार्ज पेपर में पैंक्रियाज संबंधी समस्या का भी उल्लेख होने की बात कही गई है। ऐसे में सवाल उठता है कि संबंधित विशेषज्ञ विभाग से समय रहते संपर्क क्यों नहीं किया गया?


### 16 अक्टूबर की रात मरीज दर्द से कराहती रही, कोई देखने वाला नहीं था!


परिजनों ने अपनी शिकायत में एक और बेहद गंभीर आरोप लगाया है। उनके अनुसार, 16 अक्टूबर 2026 की रात बेड नंबर 14 पर भर्ती मरीज पेट दर्द से परेशान रही, लेकिन उस दौरान वार्ड में कोई डॉक्टर अथवा नर्सिंग स्टाफ मौजूद नहीं था। परिजनों का आरोप है कि मरीज की पीड़ा के बावजूद तत्काल चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध नहीं कराई गई।


### जेरियाट्रिक विभाग की व्यवस्था पर उठे सवाल


शिकायतकर्ता का कहना है कि जेरियाट्रिक विभाग में वरिष्ठ चिकित्सकों की नियमित उपस्थिति और मरीजों की समुचित देखभाल सुनिश्चित नहीं हो पा रही है। विभाग की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए उन्होंने आरोप लगाया है कि पूरा विभाग जूनियर डॉक्टरों के भरोसे संचालित हो रहा है।


उन्होंने डॉ. अनूप सिंह के कथित गैर-जिम्मेदाराना रवैये और विभाग में अनुशासन की स्थिति की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।


### भवन निर्माण और संपत्ति की जांच की भी मांग


शिकायत में जेरियाट्रिक विभाग के भवन निर्माण की गुणवत्ता और खर्च के विवरण की भी जांच कराने की मांग की गई है। शिकायतकर्ता ने निर्माण कार्य की लागत, गुणवत्ता और वास्तविक खर्च का मिलान कराने की मांग उठाई है।


इसके साथ ही डॉ. अनूप सिंह की चल-अचल संपत्ति और कथित प्रभाव एवं रसूख की भी सक्षम जांच एजेंसी से जांच कराने का अनुरोध किया गया है।


### CCTV फुटेज से सामने आ सकता है पूरा सच


शिकायतकर्ता ने मांग की है कि 09 अक्टूबर से 17 अक्टूबर 2026 तक जेरियाट्रिक वार्ड में लगे CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग सुरक्षित कराकर जांच की जाए। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि संबंधित वरिष्ठ चिकित्सक कितनी बार वार्ड में पहुंचे और भर्ती मरीजों का कितनी बार निरीक्षण किया गया।


### PMO से उच्चस्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग


शिकायतकर्ता ने प्रधानमंत्री कार्यालय से पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए निम्नलिखित मांगें की हैं—


1. 09 से 17 अक्टूबर 2026 तक जेरियाट्रिक वार्ड की CCTV फुटेज सुरक्षित कराकर जांच कराई जाए।

2. डॉ. अनूप सिंह की वार्ड विजिट और मरीज के उपचार में उनकी भूमिका की जांच हो।

3. मरीज को समय पर नेफ्रोलॉजी एवं अन्य संबंधित विशेषज्ञों की सलाह क्यों नहीं दिलाई गई, इसकी जांच हो।

4. 16 अक्टूबर की रात्रि वार्ड में डॉक्टरों एवं नर्सिंग स्टाफ की उपस्थिति का रिकॉर्ड जांचा जाए।

5. जेरियाट्रिक विभाग की चिकित्सकीय व्यवस्था, अनुशासन और प्रशासनिक कार्यप्रणाली की उच्चस्तरीय जांच हो।

6. भवन निर्माण की गुणवत्ता एवं खर्च का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए।

7. डॉ. अनूप सिंह की संपत्ति की जांच सक्षम एजेंसी से कराई जाए तथा यदि अनियमितता प्रमाणित हो तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।


**शिकायतकर्ता का कहना है कि BHU जैसे प्रतिष्ठित केंद्रीय विश्वविद्यालय के अस्पताल में यदि बुजुर्ग मरीजों को समय पर विशेषज्ञ चिकित्सा, वरिष्ठ चिकित्सकों का निरीक्षण और आवश्यक देखभाल नहीं मिलती है, तो यह चिकित्सा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न है। उन्होंने मांग की है कि मरीजों के जीवन और स्वास्थ्य से जुड़े इस मामले में केवल औपचारिक जांच न हो, बल्कि जिम्मेदारी तय करते हुए दोषी पाए जाने वाले लोगों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।**


*अब देखना यह है कि BHU प्रशासन और प्रधानमंत्री कार्यालय इस गंभीर शिकायत पर क्या संज्ञान लेते हैं और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाते हैं।*

Shatrumardan Pravin Mani Tripathi
Shatrumardan Pravin Mani Tripathi
Reporter

Kushinagar

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