चित्रकूट में ठेकेदारों की ‘नई तकनीक’ से नालियों को राहत! घरों का पानी रोको, नालियों को जलभराव से मुक्ति दिलाओ!
चित्रकूट में ठेकेदारों की ‘नई तकनीक’ से नालियों को राहत! घरों का पानी रोको, नालियों को जलभराव से मुक्ति दिलाओ!
चित्रकूट/कर्वी। घरों से निकलने वाला पानी अगर नाली तक ही नहीं पहुँच पाए, तो लोगों को जल निकासी की सुविधा आखिर कैसे मिलेगी? चित्रकूटधाम कर्वी में एसडीएम कॉलोनी के पीछे सड़क और नाली निर्माण को लेकर उठी शिकायत ने स्थानीय लोगों की इसी चिंता को सामने ला दिया है। आरोप है कि निर्माणाधीन सार्वजनिक नाली का स्तर आसपास के घरों की जल निकासी से ऊँचा रखा जा रहा है। यदि मौके पर यह स्थिति सही पाई जाती है, तो इसका असर केवल एक मकान पर नहीं, बल्कि आसपास के कई परिवारों पर पड़ सकता है।
शिकायतकर्ता श्रीमती लीलावती ने इस समस्या को लेकर 15 सितंबर 2026 को जनसुनवाई (IGRS) पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत संख्या 40017126013482 है। शिकायतकर्ता का कहना है कि 10 अक्टूबर तक करीब 25 दिन बीत जाने के बावजूद मौके पर नाली के लेवल और ढाल की तकनीकी जाँच नहीं कराई गई। ऐसे में सवाल उठता है कि निर्माण पूरा होने से पहले समस्या की जाँच कराकर उसका समाधान क्यों नहीं किया जा रहा?

नाली बन रही है, लेकिन घरों के पानी की निकासी का क्या?
सड़क और नाली का निर्माण किसी भी मोहल्ले की बुनियादी जरूरत है। लोगों को उम्मीद रहती है कि निर्माण के बाद जल निकासी बेहतर होगी और बरसात में पानी जमा होने की समस्या से राहत मिलेगी। लेकिन यदि नाली का स्तर घरों से निकलने वाले पानी के अनुकूल नहीं हुआ, तो यही निर्माण परेशानी का कारण बन सकता है।
शिकायत में आशंका जताई गई है कि घरों का पानी सार्वजनिक नाली में नहीं पहुँच पाएगा, जिससे पानी रुकने या घरों के आसपास जमा होने की स्थिति बन सकती है। यह समस्या कई परिवारों को प्रभावित कर सकती है। इसलिए जरूरी है कि संबंधित विभाग केवल निर्माण की प्रगति न देखे, बल्कि यह भी जाँचे कि तैयार की जा रही नाली वास्तव में पानी की निकासी कर पाएगी या नहीं।
शिकायत के बाद भी जवाब का इंतजार
IGRS पर शिकायत दर्ज कराने का उद्देश्य समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना है। लेकिन जब मामला निर्माण कार्य से जुड़ा हो और काम अभी चल रहा हो, तब मौके पर जाँच का महत्व और बढ़ जाता है। समय रहते कमी सामने आ जाए तो सुधार संभव है; निर्माण पूरा होने के बाद वही काम दोबारा करना पड़े तो जनता को परेशानी और सरकारी धन—दोनों पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।
अब संबंधित नगर निकाय और प्रशासन के सामने सवाल है कि क्या नाली का लेवल, ढाल और पानी निकलने के रास्ते की जाँच की गई है? क्या आसपास के सभी प्रभावित घरों की स्थिति देखी गई है? यदि शिकायत पर जाँच हो चुकी है, तो उसके निष्कर्ष क्या हैं? और यदि जाँच नहीं हुई, तो निर्माण पूरा होने से पहले यह कब कराई जाएगी?
श्रीमती लीलावती ने जिलाधिकारी से मामले में हस्तक्षेप कर सक्षम तकनीकी अधिकारी से मौके का निरीक्षण कराने और कमी पाए जाने पर आवश्यक सुधार कराने की मांग की है।
जनता को सड़क और नाली का निर्माण चाहिए, लेकिन ऐसा निर्माण भी चाहिए जिससे उनकी रोजमर्रा की परेशानी बढ़ने के बजाय कम हो। अब देखना है कि प्रशासन इस शिकायत को केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रखता है या मौके पर जाँच कर जल निकासी की समस्या का वास्तविक समाधान सुनिश्चित करता है।


अपनी राय व्यक्त करें (कमेंट्स)
पाठकों की प्रतिक्रियाएं
अभी तक कोई टिप्पणी नहीं है। अपनी राय साझा करें!