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“तुम भंगी हो, तुम्हें नहीं पढ़ाएंगे” — लखीमपुर के सरकारी स्कूल में मासूम छात्र ने लगाया जातिगत भेदभाव का आरोप

“तुम भंगी हो, तुम्हें नहीं पढ़ाएंगे” — लखीमपुर के सरकारी स्कूल में मासूम छात्र ने लगाया जातिगत भेदभाव का आरोप

“तुम भंगी हो, तुम्हें नहीं पढ़ाएंगे” — लखीमपुर के सरकारी स्कूल में मासूम छात्र ने लगाया जातिगत भेदभाव का आरोप

लखीमपुर खीरी। आजादी के 80 वर्ष बाद भी अगर किसी सरकारी स्कूल की चौखट पर किसी बच्चे की पहचान उसकी जाति से होने लगे, तो सवाल सिर्फ एक शिक्षक या एक बच्चे का नहीं रह जाता, बल्कि उस व्यवस्था पर खड़ा होता है जिसे हर बच्चे को बराबरी का अधिकार देने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। लखीमपुर खीरी के नकहा ब्लॉक के पतरासी गांव स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय से ऐसा ही एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां कक्षा आठ के छात्र कृष्णा ने विद्यालय की शिक्षिका वंदना पर जातिगत भेदभाव और कथित छुआछूत का गंभीर आरोप लगाया है।

छात्र का आरोप है कि शिक्षिका उसे जाति का हवाला देते हुए विद्यालय से भगा देती हैं और कथित तौर पर कहती हैं— “तुम भंगी हो, तुमको नहीं पढ़ाएंगे।” छात्र ने यह भी आरोप लगाया है कि उसके साथ सामान्य विद्यार्थियों जैसा व्यवहार नहीं किया जाता, उसे पढ़ाने और छूने से इनकार किया जाता है तथा विद्यालय से मिलने वाली किताबें भी नहीं दी गईं।

मामला तब सामने आया जब छात्र का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हुआ। वीडियो में छात्र अपनी आपबीती बताते हुए दिखाई देता है। घटना सामने आने के बाद मामले ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं कि जिस सरकारी विद्यालय में बच्चों को संविधान, समानता और भाईचारे का पाठ पढ़ाया जाना चाहिए, वहीं अगर किसी बच्चे को उसकी जाति के कारण अपमानित महसूस करना पड़े तो उसकी शिक्षा और आत्मसम्मान दोनों पर क्या असर पड़ेगा।

हालांकि, अभी यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ये छात्र द्वारा लगाए गए आरोप हैं। उपलब्ध जानकारी के आधार पर आरोपों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि और किसी अंतिम विभागीय जांच का निष्कर्ष सामने नहीं आया है। शिक्षिका का पक्ष भी अभी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच ही यह तय करेगी कि छात्र द्वारा लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और जिम्मेदारी किसकी बनती है।

मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि यदि जांच में जाति के आधार पर बच्चे को अपमानित करने, उससे भेदभाव करने अथवा कथित छुआछूत का व्यवहार करने के आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह केवल विद्यालयी अनुशासन का मामला नहीं रहेगा। यह बच्चे की गरिमा, समानता और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर प्रश्न बन जाएगा।

अब निगाहें शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन पर हैं। सवाल सीधा है— क्या जांच निष्पक्ष होगी? क्या बच्चे की बात सुनी जाएगी? और अगर आरोप सही पाए गए तो क्या जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ ऐसी कार्रवाई होगी, जिससे किसी दूसरे बच्चे को उसकी जाति के कारण स्कूल में अपमानित होने का डर न रहे?

क्योंकि स्कूल की दीवारों के भीतर बैठा हर बच्चा सबसे पहले बच्चा है—उसकी जाति उसकी शिक्षा के रास्ते में दीवार नहीं बन सकती।

दैनिक धमाका पत्रिका ब्यूरो
दैनिक धमाका पत्रिका ब्यूरो

Kheri, Uttar Pradesh

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