US-Iran संघर्ष: दोस्तों, अमेरिका और ईरान की इस तनातनी को आज पूरे 50 दिन हो गए हैं। इस वक्त दुनिया की सांसें थमी हुई हैं, क्योंकि खबर ही कुछ ऐसी है। ईरान ने अंततः उस रास्ते को खोल दिया है जिस पर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था टिकी है—जी हाँ, हम बात कर रहे हैं 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' की। लेकिन ठहरिए, यह राहत इतनी आसान नहीं है। ईरान ने साफ कह दिया है कि अगर अमेरिका ने उसके बंदरगाहों की घेराबंदी नहीं रोकी, तो वह फिर से इस रास्ते पर ताला जड़ देगा।
इधर वॉशिंगटन में बैठे डोनाल्ड ट्रंप का दावा कुछ और ही है। ट्रंप साहब कह रहे हैं कि डील बस होने ही वाली है, लेकिन ईरान के तेवर देखकर तो फिलहाल ऐसा नहीं लगता।
यूरेनियम पर रार: ईरान ने ट्रंप के दावे को धो डाला
ट्रंप ने बीच में एक बात कही थी कि ईरान अपना संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) किसी दूसरे देश को सौंपने के लिए मान गया है। पर जनाब, ईरान के विदेश मंत्रालय ने इस बात को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कह दिया कि 'हमारा यूरेनियम कहीं नहीं जाएगा।' अब सवाल यह है कि अगर दोनों पक्ष अपनी-अपनी बातों पर अड़े हैं, तो फिर ये कैसी बातचीत चल रही है?
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हॉर्मुज में एंट्री चाहिए तो देना होगा 'टैक्स'
ईरान अब एक नया पैंतरा चल रहा है। खबर है कि वह हॉर्मुज के रास्ते से गुजरने वाले जहाजों पर 'सुरक्षा शुल्क' लगाने का कानून ला रहा है। यानी अगर आपको यहाँ से माल ले जाना है, तो ईरान को भुगतान करना होगा। साथ ही, उन्होंने अमेरिका और इजरायल के युद्धपोतों के लिए रेड सिग्नल दिखा दिया है।
बाज़ार को मिली थोड़ी ऑक्सीजन
जैसे ही हॉर्मुज खुलने की खबर आई, तेल के दाम जो आसमान छू रहे थे (करीब 120 डॉलर), वे एकदम से लुढ़क कर 90 डॉलर के आसपास आ गए। शेयर मार्केट में भी रौनक लौट आई है। लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यह राहत बस एक बुलबुले की तरह हो सकती है, क्योंकि जंग के मैदान में अभी भी बारूद की गंध है।
ट्रंप का 'पेपर टाइगर' वाला तंज
दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप ने नाटो (NATO) को 'कागजी शेर' बताकर उनकी मदद लेने से मना कर दिया है। उधर लेबनान में सीजफायर तो हुआ है, पर इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू अब भी कह रहे हैं कि 'काम अभी खत्म नहीं हुआ है।' यानी चिंगारी अभी भी भड़क रही है।
आगे क्या होगा?
सच कहें तो 50वें दिन की स्थिति 'तूफान से पहले की शांति' जैसी लग रही है। तेल मार्ग का खुलना दुनिया के लिए अच्छी खबर है, पर ईरान और अमेरिका के बीच जो भरोसे की कमी है, वह इस संकट को कभी भी फिर से भड़का सकती है।
आप क्या सोचते हैं? क्या ट्रंप वाकई ईरान को झुका पाएंगे या फिर यह जंग अभी और लंबी खिंचेगी? अपनी राय हमें नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं!
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