दिल्ली। दुनिया भर में अंधेपन की सबसे बड़ी संक्रामक वजह मानी जाने वाली बीमारी ट्रेकोमा से अल्जीरिया ने आज़ादी पा ली है। WHO ने आधिकारिक तौर पर अल्जीरिया को ट्रेकोमा-मुक्त घोषित कर दिया है। अल्जीरिया अफ्रीका का 10वाँ और दुनिया का 29वाँ देश बन गया है जिसने ये मुकाम हासिल किया।
ये बीमारी गंदगी और गरीबी के गलियारों में पनपती है। WHO के मुताबिक, आज भी दुनिया के 30 देशों में यह बीमारी मौजूद है। करीब 19 लाख लोग इससे अंधे या कम दिखने वाले हो चुके हैं। और सबसे बड़ी बात – 9.7 करोड़ लोग अब भी ऐसे इलाकों में रहते हैं, जहाँ यह बीमारी कभी भी फिर से उभर सकती है।
ट्रेकोमा क्या है और क्यों है खतरनाक?
यह एक बैक्टीरियल इंफेक्शन है। नाम है क्लैमाइडिया ट्रैकोमैटिस। यह बैक्टीरिया संक्रमित आँख के पानी के जरिए फैलता है। हाथ लगे, कपड़े लगे, या फिर मक्खी बैठ जाए – बस, दूसरे की आँख में भी यह पहुँच जाता है। एक बार नहीं, बार-बार इंफेक्शन हो तो पलकें अंदर की तरफ मुड़ने लगती हैं। फिर ये पलकें आँख की पुतली को नोचने लगती हैं। बहुत दर्द होता है। अंत में आदमी अंधा हो जाता है।
अल्जीरिया ने ये जंग कैसे जीती?
यह कोई एक-दो साल की कहानी नहीं है। अल्जीरिया इस बीमारी से लड़ रहा था पिछले सौ सालों से। 1909 में यहाँ पाश्चर इंस्टीट्यूट खुला। आज़ादी के बाद अल्जीरियाई डॉक्टरों ने ये मुहिम संभाली। 1974 में सरकार ने मुफ्त स्वास्थ्य सेवा शुरू की। फिर WHO की SAFE रणनीति अपनाई गई।
SAFE का मतलब है:
- S – सर्जरी (जिनकी पलकें मुड़ चुकी थीं, उनका ऑपरेशन)
- A – एंटीबायोटिक्स (बीमारी फैलने से रोकने के लिए सामूहिक दवा)
- F – चेहरे की सफाई (गंदगी ही इस बीमारी की जड़ है)
- E – पर्यावरण सुधार (साफ पानी और शौचालय की व्यवस्था)
सबसे खास बात – 2013 से 2015 के बीच अल्जीरिया ने एक तीन साल की तीव्र रणनीति बनाई। देश के 12 दक्षिणी प्रांतों पर फोकस किया गया, जहाँ यह बीमारी अब भी सिर उठा रही थी।
2022 में हुए सर्वेक्षण में पता चला कि सक्रिय ट्रेकोमा तो सब जगह खत्म हो चुका था, लेकिन तीन इलाकों में अभी भी ट्रेकोमैटस ट्राइकियासिस (मुड़ी हुई पलकों वाले मरीज) बचे हुए थे। फिर वहाँ डोर-टू-डोर जाकर हर मरीज को ढूँढा गया और उसका इलाज किया गया। दिसंबर 2025 में अल्जीरिया ने WHO को पूरा दस्तावेज सौंप दिया। WHO ने जाँच के बाद घोषणा की – हाँ, अल्जीरिया अब ट्रेकोमा-मुक्त है।
WHO प्रमुख डॉ. टेड्रोस ने क्या कहा?
डॉ. टेड्रोस ने इसे 'ऐतिहासिक जीत' बताया। उन्होंने कहा कि यह साबित करता है कि लगातार राजनीतिक इच्छाशक्ति और स्वास्थ्य कर्मियों की मेहनत से उपेक्षित बीमारियों को भी खत्म किया जा सकता है।
अल्जीरिया के स्वास्थ्य मंत्री का बयान
प्रोफेसर मोहम्मद सेडिक ऐत मेसाउदेन ने कहा – यह कोई एक दिन की उपलब्धि नहीं है। यह लगभग पचास साल के राष्ट्रीय अभियान का फल है। यह साबित करता है कि हमारा देश सबसे कड़े स्वास्थ्य मानकों को पूरा करने की क्षमता रखता है।
उन्होंने यह भी कहा – यह जीत सिर्फ सरकार की नहीं है, बल्कि हर उस स्वास्थ्यकर्मी की है जिसने सालों सुदूर गाँवों में जाकर काम किया, हर उस परिवार की है जिसने साफ-सफाई अपनाई।
आगे क्या?
WHO ने साफ कहा है – उन्मूलन का मतलब यह नहीं कि निगरानी बंद कर दी जाए। अल्जीरिया को अब भी नजर रखनी होगी कि कहीं यह बीमारी फिर से न उभर आए। WHO इस काम में अल्जीरिया की मदद करता रहेगा।
अल्जीरिया की यह कहानी सिखाती है कि कोई भी बीमारी अगर सौ साल पुरानी है, तो उसे खत्म करने में भी सौ साल लग सकते हैं। लेकिन लगातार मेहनत और सही रणनीति से वो दिन जरूर आता है। सबसे अच्छी बात यह है कि अल्जीरिया ने सिर्फ दवा बाँटने भर से काम नहीं किया, बल्कि साफ पानी, शौचालय और शिक्षा पर भी काम किया। यही असली मॉडल है।
भारत जैसे देशों के लिए भी यह एक सीख है – ट्रेकोमा यहाँ भी कई इलाकों में मौजूद है। अल्जीरिया ने दिखा दिया कि अगर ठान लिया जाए, तो यह बीमारी भी जड़ से खत्म की जा सकती है।




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