प्रदीप सिंह चौहान
जसवंतनगर/इटावा। क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में लगातार हो रही बिजली कटौती से लोगों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। पिछले पांच दिनों से हालात यह हैं कि रात के समय बिजली लगभग पूरी तरह गुल रहती है, जिससे लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार विभिन्न फीडरों पर रातभर ‘पनकी कोड’ के तहत बिजली कटौती की जा रही है और महज एक-दो घंटे ही आपूर्ति मिल पा रही है। भीषण गर्मी के बीच लोग रातभर हाथ से पंखा झलकर किसी तरह मच्छरों के गाने सुनते हुए समय काटने को मजबूर हैं। बिजली के दर्शन सुबह हो जाते थे लेकिन शनिवार को तार टूट जाने के कारण भी नहीं हुए हैं।
उपभोक्ताओं का कहना है कि इन दिनों बिजली आपूर्ति पूरी तरह अनियमित हो गई है। निर्धारित शेड्यूल के अनुसार बिजली नहीं मिलने से उनकी दिनचर्या बुरी तरह प्रभावित हो रही है। सरकार जहां शहरों में 20 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में 16 घंटे बिजली देने का दावा कर रही है, वहीं हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत नजर आ रही है।
लोगों का आरोप है कि इमरजेंसी कटौती के नाम पर 10 से 12 घंटे तक बिजली गुल कर दी जाती है, जबकि लोकल रोस्टिंग के तहत 6 से 7 घंटे अतिरिक्त कटौती होती है। इसके बाद फॉल्ट और शटडाउन के नाम पर 4 से 5 घंटे और बिजली बंद कर दी जाती है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में कुल मिलाकर केवल 4 से 5 घंटे ही बिजली मिल पा रही है।
रात को क्षेत्र के करीब नौ फीडरों से जुड़े दो सौ से अधिक गांवों में दिनभर रोस्टर के अलावा इमरजेंसी कटौती की गई। रात में भी स्थिति बदतर रही और शनिवार को खबर लिखे जाने तक बिजली आपूर्ति सुचारू नहीं हो सकी। यह स्थिति लगातार चार दिनों से बनी हुई है।
शिकायत करने पर विभागीय अधिकारी इमरजेंसी कटौती का हवाला देकर पल्ला झाड़ लेते हैं, जिससे उपभोक्ताओं में भारी आक्रोश है। एसडीओ आनंद पाल सिंह ने बताया कि सुबह रायनगर से ग्रामीण क्षेत्र को सप्लाई देने वाली 33 केवी लाइन का तार टूट जाने से बिजली बाधित हुई है। टीम मौके पर काम कर रही है और जल्द ही आपूर्ति बहाल कर दी जाएगी। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि रात में पनकी कोड के तहत कटौती की जा रही है।




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