प्रदीप सिंह चौहान
जसवंतनगर/इटावा। जल पोखरा गांव में चकरोड को लेकर बड़ा बवाल खड़ा हो गया। ग्रामीणों के विरोध के बावजूद जेसीबी से जबरन काम कराए जाने की कोशिश ने माहौल गरमा दिया और मामला खुलकर सामने आ गया।
ग्रामीणों का कहना है कि पहले लेखपाल द्वारा चकरोड की नापतौल की गई थी, लेकिन उससे असंतुष्ट होकर 17 मार्च को तहसील में दोबारा पैमाइश के लिए प्रार्थना पत्र दिया गया था। हैरानी की बात यह है कि अब तक दोबारा नाप नहीं कराई गई, लेकिन अचानक बिना किसी आधिकारिक आदेश के जेसीबी (UP75CT1077) लगाकर चकरोड पर काम शुरू करा दिया गया। जैसे ही यह खबर गांव में फैली, ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और जमकर विरोध करते हुए जेसीबी को रुकवा दिया। हालात बिगड़ते देख जेसीबी चालक और रोजगार सेवक जितेंद्र मौके से भाग निकले। ग्रामीणों ने सीधे तौर पर पंचायत सचिव और रोजगार सेवक की मिलीभगत से अवैध कार्य कराए जाने के आरोप लगाए हैं। सूचना पर पहुंची डायल 112 पुलिस ने सिर्फ औपचारिकता निभाते हुए हालात का जायजा लिया, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस ने मौके पर खड़ी जेसीबी को बिना कार्रवाई के छोड़ दिया और मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया।
प्रधान वीर सिंह ने भी साफ शब्दों में कहा कि यह काम ग्राम पंचायत की किसी भी स्वीकृत कार्य योजना में शामिल नहीं है। उन्होंने बताया कि जब रोजगार सेवक से जवाब मांगा गया तो उसने पंचायत सचिव के निर्देश पर काम कराने की बात स्वीकार की।
मौके पर मौजूद ग्रामीणों—साहूकार सिंह, नेपाल सिंह, वासुदेव सिंह, मान सिंह, सतीश बाबू, दिनेश कुमार, नेम सिंह, मिथलेश, अखिलेश, अशोक, धर्मेंद्र, रक्षपाल सिंह और सर्वेश कुमार समेत कई लोगों ने प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द निष्पक्ष नापतौल कराकर दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन तेज किया जाएगा।




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