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19 जून का इतिहास: जब गुलाम हुए आज़ाद, भारत ने अंतरिक्ष में लहराया परचम, और गारफील्ड ने मचाई धूम

19 जून का इतिहास: जब गुलाम हुए आज़ाद, भारत ने अंतरिक्ष में लहराया परचम, और गारफील्ड ने मचाई धूम

19 जून का इतिहास: जब गुलाम हुए आज़ाद, भारत ने अंतरिक्ष में लहराया परचम, और गारफील्ड ने मचाई धूम

इतिहास का हर दिन अपने आप में एक कहानी है, लेकिन 19 जून की कहानी में एक अलग ही दम है। यह तारीख उस सुबह की तरह है जब अमेरिका में गुलामी की रात ढली, भारत ने अंतरिक्ष में अपनी छलांग लगाई, और दुनिया को एक नया हँसोड़ बिल्ला 'गारफील्ड' मिला। आइए, एक नजर डालते हैं 19 जून के उन सुनहरे पन्नों पर जिन्होंने दुनिया और भारत की दिशा बदल दी।


दासता का अंत और 'जूनटीन्थ' का जन्म

साल 1865 का 19 जून। अमेरिका के टेक्सास प्रांत में खबर पहुँची कि राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन ने तो ढाई साल पहले ही गुलामी खत्म करने का ऐलान कर दिया था। जानकारी के अभाव में वहाँ के अफ्रीकी-अमेरिकी गुलाम अब तक बंधुआ मजदूरी कर रहे थे। इसी दिन उन्हें आजादी का पता चला, और बस वहीं से 'जूनटीन्थ' (Juneteenth) की नींव पड़ी। आज यह दिन अमेरिका में स्वतंत्रता, समानता और इंसानियत के प्रतीक के रूप में राष्ट्रीय अवकाश है। यह तारीख बताती है कि आज़ादी की खबर चाहे देर से पहुँचे, लेकिन उसकी कीमत कभी कम नहीं होती।


जब भारत ने अंतरिक्ष में बोला 'एप्पल' और दुनिया चौंकी

19 जून 1981। यह तारीख हर भारतीय के लिए गर्व का दिन है। इस दिन इसरो ने फ्रेंच गुयाना से एरियन रॉकेट की मदद से 'एप्पल' (APPLE – Ariane Passenger Payload Experiment) नाम का एक प्रायोगिक संचार उपग्रह सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में स्थापित किया। यह भारत का पहला भूस्थिर संचार उपग्रह था। भले ही यह एक प्रयोग था, लेकिन इसने देश में दूरसंचार और टेलीविजन प्रसारण की क्रांति की बुनियाद रखी। आज जब हम मोबाइल पर बात करते हैं या डीटीएच देखते हैं, तो उसकी शुरुआत की एक चिंगारी 19 जून 1981 को ही फूटी थी। इस मिशन ने साबित कर दिया कि सीमित संसाधनों के बावजूद भारत के वैज्ञानिक किसी से पीछे नहीं हैं।


कुवैत ने ली आज़ादी की साँस

19 जून 1961 को एक और देश गुलामी की जंजीर तोड़कर आज़ाद हुआ—कुवैत। ब्रिटेन से स्वतंत्रता मिलने के बाद कुवैत ने तेल संपदा के बल पर तेज़ी से तरक्की की और आज दुनिया के अमीर देशों में गिना जाता है। इस दिन को कुवैत अपने राष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाता है।


सलमान रुश्दी: बंबई का वो लड़का जिसकी कलम ने सरहदें तोड़ीं

19 जून 1947 को बंबई (अब मुंबई) में एक ऐसे लेखक का जन्म हुआ जिसकी रचनाओं ने दुनिया भर में भारतीय अंग्रेजी साहित्य का परचम लहराया। सलमान रुश्दी अपनी किताब 'मिडनाइट्स चिल्ड्रन' के लिए बुकर पुरस्कार जीत चुके हैं। भले ही वे विवादों में रहे हों, लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि उन्होंने भारतीय लेखन को एक नई ऊँचाई और पहचान दी। 19 जून उनकी स्याही को सलाम करने का दिन है।


1978: गारफील्ड ने अखबारों में मचाई धूम

बिल्लियों से प्यार करने वालों के लिए 19 जून का दिन खास है। 1978 में आज ही के दिन जिम डेविस का मशहूर कार्टून किरदार 'गारफील्ड' पहली बार 41 अमेरिकी अखबारों में छपा। लज़ीज़ खाने और आलस से भरपूर इस नारंगी बिल्ले ने देखते-ही-देखते दुनिया भर के बच्चों और बड़ों के दिलों में जगह बना ली। गारफील्ड की लोकप्रियता इस बात का सबूत है कि हँसी-मज़ाक की कोई भाषा नहीं होती।


भारतीय राजनीति का वो मोड़ जब तय हुआ देश का सर्वोच्च पद

19 जून 1977 का दिन भारतीय राजनीति के लिए भी अहम है। आपातकाल के बाद बनी जनता पार्टी सरकार और कांग्रेस (ओ) ने संयुक्त रूप से नीलम संजीव रेड्डी को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किया। बाद में वे देश के छठे राष्ट्रपति बने। यह पहला मौका था जब किसी गैर-कांग्रेसी नेता को इस सर्वोच्च पद के लिए इतना व्यापक समर्थन मिला था।


छोटी-छोटी बूँदों से बना 19 जून का इतिहास

  • 1269: फ्रांस के राजा लुई ने धर्मयुद्ध के दौरान यहूदियों को पीला बिल्ला पहनने का आदेश दिया—मानवता पर एक काला धब्बा।

  • 1867: मैक्सिकन सम्राट मैक्सिमिलियन को फाँसी दी गई।

  • 1953: अमेरिका में जूलियस और एथेल रोज़ेनबर्ग को जासूसी के आरोप में मृत्युदंड—एक विवादित अध्याय।


स्वतंत्रता और उपलब्धि का प्रतीक है 19 जून

चाहे टेक्सास के गुलामों की आज़ादी हो, भारत का अंतरिक्ष में बढ़ता कदम हो, या अभिव्यक्ति की आज़ादी—19 जून हर रूप में स्वतंत्रता, गरिमा और प्रगति का दिन है। इतिहास के ये किस्से हमें याद दिलाते हैं कि बदलाव चाहे धीमा हो, लेकिन आता ज़रूर है।


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