UP पंचायत चुनाव की फाइनल वोटर लिस्ट जारी, 1.81 करोड़ नए मतदाता जुड़े, हर वोटर को मिला यूनिक नंबर, लेकिन चुनाव अभी 6 महीने दूर
UP पंचायत चुनाव की फाइनल वोटर लिस्ट जारी, 1.81 करोड़ नए मतदाता जुड़े, हर वोटर को मिला यूनिक नंबर, लेकिन चुनाव अभी 6 महीने दूर
लखनऊ। उत्तर प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग ने बुधवार को त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2026 के लिए अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी। पाँच बार टालने के बाद आई इस सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव किए गए हैं। करीब 1.81 करोड़ नए मतदाता जोड़े गए हैं, जबकि 1.41 करोड़ नाम हटाए गए हैं। इस तरह मतदाता सूची में कुल 40.19 लाख की शुद्ध वृद्धि दर्ज की गई है। हटाए गए नामों में मृतक, स्थानांतरित और डुप्लीकेट प्रविष्टियाँ शामिल हैं।
हर मतदाता को मिला 9 अंकों का स्टेट वोटर नंबर
आयोग ने इस बार एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए प्रदेश के हर पंचायत मतदाता को एक अनोखा 9-अंकीय राज्य मतदाता पहचान नंबर (State Voter Number) जारी किया है। इस व्यवस्था का सीधा उद्देश्य मतदाता सूची से डुप्लीकेट नामों को स्थायी रूप से खत्म करना और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से भविष्य में बूथ कैप्चरिंग और फर्जी मतदान की घटनाओं पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।
डाउनलोडिंग में तकनीकी परेशानी, आयोग ने माँगा समय
अंतिम सूची जारी होते ही कई जिलों के मतदाताओं और अधिकारियों को इसे डाउनलोड करने में तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। राज्य निर्वाचन आयोग ने इस समस्या को स्वीकार करते हुए कहा है कि इसे दूर करने के लिए तकनीकी टीम लगातार काम कर रही है और जल्द ही सभी जिलों की सूचियाँ सुगमता से उपलब्ध हो जाएँगी।
चुनाव कम से कम 6 महीने टला, प्रधान बने प्रशासक
हालाँकि मतदाता सूची जारी हो चुकी है, लेकिन पंचायत चुनाव अभी कम से कम छह महीने दूर हैं। ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो गया था। चुनाव न होने के कारण योगी सरकार ने सभी निर्वाचित प्रधानों को अगले छह महीने के लिए प्रशासक (Administrator) नियुक्त कर दिया है। सरकार के इस फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है।
हाईकोर्ट सख्त, 10 जुलाई तक माँगा जवाब
चुनाव में देरी से नाराज इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से स्पष्टीकरण माँगते हुए 10 जुलाई को अगली सुनवाई की तारीख तय की है। कोर्ट ने सरकार को 10 जुलाई तक चुनाव की तारीख बताने के भी निर्देश दिए हैं। इससे पहले आयोग ने 18 दिसंबर 2025 को एक मसौदा सूची प्रकाशित की थी, जिसके बाद से ही चुनाव कार्यक्रम को लेकर अनिश्चितता बनी हुई थी।
राजनीतिक दलों की चिंता, विधानसभा चुनाव पर पड़ सकता है असर
पंचायत चुनाव में पार्टी के प्रतीक चिन्ह पर चुनाव नहीं लड़ा जाता, लेकिन राजनीतिक दलों को आशंका है कि साल के अंत में पंचायत चुनाव कराने से उनकी संगठनात्मक ताकत बिखर सकती है। इसका सीधा असर फरवरी-मार्च 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों पर पड़ सकता है। ऐसे में सभी दल इस स्थिति पर पैनी नज़र बनाए हुए हैं।
राज्य निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि अंतिम मतदाता सूची अब सभी जिलों की वेबसाइट और संबंधित पंचायत कार्यालयों में उपलब्ध कराई जा रही है। मतदाता अपना नाम जाँचने के लिए आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं या अपने ग्राम पंचायत कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं। अब सबकी निगाहें 10 जुलाई पर टिकी हैं, जब हाईकोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई होगी और संभवतः चुनाव की तारीखों पर स्थिति साफ हो पाएगी।
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